क्या जिला हरदोई के शासक योगी आदित्यनाथ नहीं बल्कि पुलकित खरे हैं ? और वो भी लोकतान्त्रिक नहीं बल्कि तानाशाह ..

कुछ समय पहले की ही बात है ये जब प्रयागराज में एक गौशाळा में कई गायो की असमय मृत्यु हो गई थी.. उस समय योगी सरकार की किरकिरी का कारण बने थे जिलाधिकारी प्रयागराज और उनके अन्य सम्बन्धित अधीनस्थ.. कड़ी कार्यवाही हुई थी इस मामले में और सम्बन्धित विभागों के तमाम लोगों को कोपभाजन बनना पड़ा था शासन के आदेशो का. जिलाधिकारी ने भी जो न्यायोचित था वो किया था और अंत में बाकी जनपदों के लिए गया था एक कड़ा और बड़ा संदेश .

लेकिन अगर बात हरदोई की हो तो वो जिला आज कल सबसे अलग चल रहा है . यहाँ के पत्रकारों के साथ पुलिस वालों को भी शायद अब शक होने लगा हो कि वो जनपद हरदोई में ही रहते हैं या कहीं और क्योकि यहाँ के जिलाधिकारी पुलकित खरे ने अपने अंदाज़ में इस स्थान को उत्तर कोरिया बनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी है . यद्दपि ये IAS हैं लेकिन इनके उलटे सीधे कार्य देख कर ऐसा लगता है कि ये हरदोई के किम जोंग हैं जिनके हाथ में इतनी शक्ति है कि ये जो चाहे वो कर सकते हैं .

सडक पर बेसहरा पशु देख कर इनका पारा चढा और इन्होंने जिला पशुपालन अधिकारी , इलाके के अन्य सम्बन्धित अधिकारियों के बजाय सीधे सीधे चौकी इंचार्ज पर ही चाबुक चला दिया और उसको अपनी तरफ से सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया.. इन्होने ऐसा कदम उठा कर शायद अन्य सभी विभागों को क्लीन चिट दे डाली और ये बता डाला कि कुछ भी हो, जिम्मेदार पुलिस ही होगी … इनके इस कदम के बाद न सिर्फ आम जनमानस बल्कि प्रशासनिक अधिकारयो में भी भय का माहौल जैसा बन गया है .

इनको सम्पर्क करना भी आसान नहीं है . अर्थात जिस प्रकार से राजा महराजाओ से मिलने के लिए समय लेना पड़ता था और वहां सर झुका कर बात करनी होती थी लगभग वही रीति इन्होने अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में चला रखी है . जिला हरदोई सुदर्शन न्यूज संवाददाता अम्बुज के अनुसार किसी अन्य विषय पर इन्हें कई बार फोन मिलाने के बाद बार बार फोन कटता रहा और बाद में कहा कि अपनी बाईट मुझ से नहीं बल्कि SDM से ले लो.. पत्रकारों से इतना बेरुखी दिखाने वाले जनता के लिए कैसे होंगे इसका अंदाज़ा लगना मुश्किल नहीं है .

फिलहाल पुलकित खरे नाम के इन जिलाधिकारी महोदय ने अब हरदोई के पत्रकारों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वो योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश के जपनद हरदोई में ही रहते हैं या किम जोंग शासित उत्तर कोरिया में.. प्रशासनिक अधिकारियो से जहाँ शासन सहयोगात्मक रवैये की अपेक्षा कर रहा है तो वही हरदोई का नजारा कुछ अलग ही है..फ़िलहाल जिलाधिकारी हरदोई जिले में अपनी धाक जमा देने और हर किसी के अन्दर खौफ पैदा करने में सफल होते दिखाई दे रहे हैं भले ही योगी आदित्यनाथ शासन ने इनको किसी भी अन्य मंशा से हरदोई की कमान दी रही होगी .

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