उत्तर प्रदेश में आमूलचूल परिवर्तन हुआ गत 30 माह में. इस एतिहासिक बदलाव के सारथी रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ


निश्चित तौर पर जनता के 90 माह पहले रोष था और असंतोष भी था जिसके चलते बेसब्री से चुनावों का इंतजार करता जनमानस समय आने पर बढ़ चढ़ कर मतदान किया और एक नई सरकार सत्ता में आई.. फिर सर्वसम्मति से योगी आदित्यनाथ जी को मुख्यमंत्री चुना गया और अब तक के कार्यकाल के आधार पर ये जनता की आवाज है कि उन्होंने अपने चुनाव को सही और सार्थक ठहराया है.. आज भाजपा की उसी सरकार के 90 माह पूरे हो गये हैं जिसमे योगी सरकार की उपलब्धियों का आंकलन किया जा रहा है..

अगर इन 90 माह के कार्यकाल पर नजर डाली जाय तो कई ऐसे बदलाव उत्तर प्रदेश में हुए जो निश्चित तौर पर एतिहासिक व अप्रत्याशित कहे जायेंगे.. ये बदलाव मात्र एक या 2 क्षेत्रों में नहीं हुए बल्कि सर्वांगीण विकास के साथ आमूलचूल परिवर्तन का गवाह बना है उत्तर प्रदेश जिसको यहाँ का हर वर्ग स्वीकार कर रहा है . भले ही वो वर्ग व्यापारी हो , या छात्र हो , या नौकरीपेशा हो .. इसी के साथ पुरुष और महिला दोनों ने इस सरकार के द्वारा किये गये बदलावों को स्वीकार किया है .

अगर क्रमवार देखा जाय तो अन्य सरकारों में कई ऐसे अनछुए पहलू रहे हैं जिस पर वर्तमान भाजपा सरकार ने पूरा ध्यान दिया और उन समस्याओ की जड में जा कर उसका स्थाई समाधान तलाशा है या उस दिशा में कदम बढ़ाया है.. आज अगर व्यापक जनभावना को 10 में से नम्बर देने की बात की जाय तो अधिकतर लोग इस सरकार को 10 में से 10 अंक ही देंगे.. जनअपेक्षा पर खरे उतरने के लिए इस अल्पअवधि में अपना सर्वस्व झोंका है वर्तमान सरकार के मंत्रियों ने ..

अगर कुछ अतिमहत्वपूर्ण मामलों को क्रमवार देखा जाए तो वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार की निम्नलिखित उपलब्धियां अभूतपूर्व रही हैं-

1- अधिकारियो और मंत्रियों के बीच बेहतर सामंजस्य – ये वो विषय हुआ करता था जो तमाम सरकारों के लिए चुनौती होता था . तमाम सरकारों में उनके कार्यकर्ताओं के साथ जनप्रतिनिधियों की तानाशाही और दादागीरी कर्मठता से कार्य करने वाले अधिकारियो के कार्यो को को प्रभावित करती थी .. इस से प्रदेश का विकास नहीं बल्कि विवाद बढ़ता था .. योगी आदित्यनाथ सरकार में ऐसी घटनाओं की शून्यता दिखाई दी है और अधिकारियो को स्वतंत्र हो कर कार्य करने का मौक़ा मिला जिसका असर समाज की शांति, सुरक्षा और विकास पर साफ़ साफ देखने को मिल रहा है ..

2- अधिकारियों- अधिकारियो व अधिकारियो – कर्मचारियों में सहयोगात्मक माहौल – कभी 2 विभागों के विवाद में तमाम आवश्यक कार्य अधूरे रह जाया करते थे.. हालात यहाँ तक बनते थे कि वर्षो तक एक ही सरकार के दोनों विभाग अदालत में चक्कर काटते थे.. इस से लम्बित कार्य कई वर्ष तक अधूरे रह जाते थे .. योगी सरकार में ऐसी कोई समस्या नहीं देखने को मिली .. IAS – IPS जैसे बड़े पदों से ले कर केंद्र – राज्य तक के विभागों व उनके अधिकारी कर्मचारियों में सहयोगात्मक माहौल देखने को मिला . शायद ही 2 विभागों का कोई मामला अदालत तक पहुचा क्योकि अधिकतर मामले टेबल पर ही निबटा दिए गये .

3- प्रथम बार पुलिस बल के लिए सरकार की संवेदना – इस से पहले कई सरकारों ने पुलिस को एक हथियार की तरह दुरुपोग किया था . उन पुलिसकर्मियों को भारी दबाव में भले ही रखा जाता रहा हो पर उनके वेतन वृद्धि , उनकी सुविधा वृद्धि आदि की कभी चिंता न के बराबर की गई थी.. योगी सरकार ने दिन रात अथक प्रयास कर के अपराध व आतंक से लड़ते पुलिस बल के भत्तो को बढाया व उनके नये आवास आदि के लिए योजनाओं का शुभारंभ किया.. उनके ऊपर से भारी दबाव को हटाया और अपराधियों के खिलाफ उनके बंधे हाथो को खोला.. उसी का प्रतिफल है कि बड़े बड़े दुर्दांत अपराधी या तो मारे गये या जेलों में है . कई प्रदेश छोड़ कर भाग गये और कईयों ने गले में तख्तियां डाल कर घूम घूम कर फिर अपराध न करने की कसम खाई ..

4- अयोध्या, मथुरा काशी व अन्य धर्मस्थलो को फिर वैदिक स्वरूप देना – कभी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के विकृत रूप के चलते हिन्दू समाज ही नहीं बल्कि उनके देवी देवता भी तिरष्कृत होते थे.. अयोध्या जैसे अति पावन धर्मस्थल पर भी गंदगी का अम्बार देखने को मिल जाता था.. होली – दीपावली आदि में भी अयोध्या की गलियों में अँधेरा दिखाई देता था .. 2014 लोकसभा चुनावों में हार के बाद तो पूरा प्रदेश अँधेरे में था लगभग 1 सप्ताह.. योगी सरकार ने केंद्र की सबका साथ सबका विकास नीति को अपनाते हुए भूले बिसरे हिन्दुओ की सुधि ली और अयोध्या , मथुरा , काशी जैसे कई पवित्र धर्मस्थलों को उनके वैदिक स्वरूप में फिर से स्थापित किया.. इसी क्रम में इसी प्रेरणा से जिलाधिकारी अयोध्या अनुज कुमार झा ने पौराणिक व श्रीराम कालीन विलुप्त होने के कगार पर आ चुकी तमसा नदी को फिर से अविरल किया .. मध्य प्रदेश की सीमा पर विस्मृत कर दिए गये पवित्र चित्रकूट की बेहतर ढंग से सुध लेने वाले एकलौते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही माने जा सकते है .

5- ग्रामीण व शहरी क्षेत्रो में निर्बाध बिजली आपूर्ति – गावों से आम जनमानस के पलायन का सबसे बड़ा कारण कभी वहां 2 या 4 घंटे बिजली का आना होता था.. इसी के चलते वहां पर कोई कल कारखाने या कुटीर उद्योग सफल नहीं होते थे.. कभी मूर्तियों पर ही सारा सरकारी धन व्यय कर दिया जाता था और गाँव के लोग पक्की सडको के लिए मोहताज हुआ करते थे .. योगी सरकार में गाँवों से पलायन होने के बजाय कई शहरी लोग दुबारा अपने गाँवों में जा कर बस गये हैं क्योकि उनके हिसाब से अब गाँव और शहर में ज्यादा अंतर नहीं रहा . पक्की सडकें , जल , बिजली आदि की उपलब्धता अब गाँवों में शहरो के लगभग बराबर कर दी गई है जिसके चलते अब गाँवों में बसने वाली जनता खुशहाल है ..

6- दंगो व मजहबी उन्माद को काबू करना व पलायन जैसी घटनाओ का खात्मा – सबको ठीक से याद होंगे मुज़फ्फरनगर दंगो से ले कर प्रयागराज , अयोध्या , गोंडा , सहारनपुर , शामली , अलीगढ की साम्प्रदायिक घटनाएं.. इसके बाद एक ही वर्ग का एकतरफा दमन भी जिस प्रकार से हुआ वो भी कईयों को याद होगा.. सरकार बदलते ही न्याय हुआ और निरपराध फंसाए गये लोगों से मुकदमे वापस हुए . कई ऐसे लोग भी रहे जो सरकार बनने के बाद अपने घरो में वापस लौट कर आ पाए.. इसी के साथ एक भी ऐसी घटना नही हुई जिसको दंगा कहा जा सके . जहाँ भी उन्मादी हरकत हुई वहां पुलिस को पूरी छूट दी गई उसका सख्ती से दमन करने की. अब कहीं भी गुंडा टैक्स या पलायन जैसी घटना सामने नहीं आई है .. इसी के चलते प्रदेश की जनता खुद को भयमुक्त मानती है ..

7- हर प्रकार के माफिया पर नकेल , न किसी का कद देखा गया न किसी का पद – कभी कोई मऊ जिले में सत्ता संरक्षण में खुद को बाहुबली कहता था तो कभी कोई प्रयागराज जनपद में अपराध करने एक बाद भी मुख्यमंत्री के मंच पर दिखाई देता था.. इसी के साथ सहारनपुर जैसे जिलो को खनन माफियाओं ने अपनी जकड़ और पकड़ दोनों में ले रखा था. योगी सरकार ने शराब माफिया , नकल माफिया , अपराधिक माफिया , खनन माफिया जैसी हर दादगीरी पर प्रभावी कार्यवाही की.. माफिया तंत्र के कई बड़े नाम आज के समय जेल में हैं या तो बेल ले कर अपराध करने से बजाय खुद को बचाने के लिए परेशान हैं.. परित्राणाय साधुना विनाशाय च दुष्कृताम के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए योगी सरकार ने समाज को हर प्रकार के माफिया तंत्र से बिना उनका कद या उनका पद देखे निर्भयता दी है .. IPS अजय पाल शर्मा के नेतृत्व में कार्य कर रही रामपुर पुलिस की कार्यवाही इसका सबसे उत्कृष्ट उदहारण कहा जा सकता है ..

8- प्रयागराज में कुम्भ और अयोध्या में रामनवमी जैसे बड़े आयोजन भव्य रूप में सकुशल सम्पन्न – तीर्थराज कुम्भ में इस बार जिस प्रकार से व्यवस्था थी उसकी चर्चा न सिर्फ देश के कोने कोने में हुई बल्कि इस बार के भव्य आयोजन की चर्चा पूरे विश्व में रही.. दुनिया के तमाम देशो से यहाँ पर भक्त और यात्री आये और उन्होंने माना कि इस प्रकार के आयोजन उनके जीवन में पहली बार इतने सुविधाजनक रूप में सम्पन्न हुए.. इसी के साथ अयोध्या जनपद में श्रीराम नवमी का भव्य मेला भी इस बार की सुर्खियाँ रहा. यहाँ का संत समाज अभी भी यहाँ के SSP आशीष तिवारी के नेतृत्व व योगी सरकार के कुशल निर्देशन की भूरि भूरि प्रसंशा करता है .. अयोध्या के श्रीरामनवमी मेले व तीर्थराज प्रयागराज के कुम्भ में सुविधा के साथ सुरक्षा का भी ऐसा अभूतपूर्व प्रबंध रहा कि परिंदा भी पर नहीं मार सका और सभी भक्त व यात्री निर्भयता से मेले का आनंद लिए ..

9 – अपराध ही नहीं, आतंकवाद मुक्त प्रदेश बना उत्तर प्रदेश – हर किसी को याद होंगे कभी अयोध्या और काशी में किस प्रकार से आतंकी हमले किये गये . वहां पर जान और माल दोनों की हानि हुई थी . कभी विदेशो से प्रशिक्षित कई आतंकी आ कर उत्तर प्रदेश की धरती पर शरण पाते थे और यहाँ पर अपने निशाने तय कर के आंतकी हमले करते थे.. कभी पिछली सरकारों में आज़मगढ़ क्षेत्र से भारत में हुई कई आतंकी हमलो का कनेक्शन पाया गया था .. लेकिन अब हालात बदल गये हैं . पिछले 90 दिनों में आतंकी एक भी हमला करने में सफल नहीं हो पाए.. जबकि बदले हालातो में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने अन्य प्रान्तों में जा कर काफी समय से फरार कई आतंकियों को गिरफ्तार किया. पुलिस की सख्त कानूनी पैरवी से तमाम उन्मादियो को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यो के आधार पर सजा भी दी.. चम्बल क्षेत्र से डाकुओ का भी समूल खात्मा किया गया ..

10 – शिक्षा क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता व सुधार – योगी सरकार आने के बाद प्रदेश में संस्कृत भाषी लोगो में एक उम्मीद जगी.. शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अथक प्रयास किये गये . स्कूलों की फीस की मनमानी पूरी तरह से काबू की गई जिसके चलते शिक्षा का व्यवसाईकरण रुका.. अध्यापको को सक्रिय किया गया व विद्यालयों में सुरक्षा के मानक तय किये गये.. बच्चो के साथ बच्चो के अभिभावकों को भी इस से काफी राहत मिली और अब “अच्छा स्कूल गरीब की पहुच से दूर” जैसी अवधारणा खत्म हुई है.. सुसंस्कृत और सुशिक्षित यही कर्णधार आने वाले समय में एक मजबूत राष्ट्र की बुनियाद रखेंगे इस विचार के साथ दूरगामी परिणामो को देखते हुए शिक्षा के मानक तय किये जा रहे है ..

11- निष्क्रिय कर्मचारियों की छंटनी – ये एक ऐसा कदम था जिसका अनुसरण कई अन्य प्रदेशो ने भी किया . वो स्टाफ जो अपने कार्यकाल में समाज के लिए कोई सार्थक कार्य नहीं कर पाए थे उनको सेवानिवृत्त किया गया.. उनके बदले जागरूक व सक्रिय लोगों को अवसर दिया गया.. ये छंटनी हर विभाग में की गई जिसमे समाज की रक्षा के लिए सबसे बड़ी उत्तरदायी पुलिस विभाग में की गई छंटनी सबसे प्रमुख रही थी.. योगी सरकार के इस कदम ने बाकी कई सरकारी स्टाफ को स्वतः सक्रियता दी और उस सक्रियता का साफ़ साफ असर आज एक विकासशील व सुरक्षित समाज के रूप में साफ़ दिखाई दे रहा है .

 

 

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