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दूषित होती देवभूमि.. लगभग 30 वर्षों से देहरादून में रह रहा था रोहिंग्या परिवार और किसी को भनक भी नहीं लगी

अवैध रूप से घुसपैठ करके हिंदुस्तान को खोखला कर रहे रोहिंग्या आक्रांताओं का संक्रमण देवभूमि उत्तराखंड में भी फ़ैल चुका है. खबर के मुताबिक़, राजधानी देहरादून के पटेलनगर थाना क्षेत्र में तीन दशक से रह रहे दो रोहिंग्या (बांग्लादेशी नागरिक) को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. दोनों से फर्जीवाड़े से बनाए गए मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए हैं तो वहीं एक भारतीय पासपोर्ट भी बरामद हुआ है.

सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, एसएसपी निवेदिता कुकरेती के निर्देश पर एलआईयू और पटेलनगर थाना पुलिस ने माजरा में सत्यापन अभियान चलाया. इस दौरान दो रोहिंग्या पुलिस ने गिरफ्तार किए हैं. इन आरोपियों की पहचान नजरूल इस्लाम (40 वर्ष) पुत्र शहजान हाल निवासी प्रधान वाली गली निकट हालीम मोहल्ला माजरा और सहफुल हसन (30) पुत्र मोहम्मद हसन निवासी मेहूंवाला माफी शिमला बाईपास रोड नयानगर दोनों मूल निवासी बोड़ोवाड़ीया, थाना चीतलमारी, जिला बागेरहाट (बांग्लादेश) के रूप में हुई. दोनों के खिलाफ विदेशी अधिनियम, पासपोर्ट एंट्री इनटू इंडिया एक्ट-1920, धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया. गिरफ्तार नजरूल बीते 29 साल और सहफुल 19 साल से देहरादून में रह रहे थे.

पता चला है कि गिरफ्तार किये गये रोहिंग्याओं ने यहां रहकर पहले एक दो वर्ष पढ़ाई की और शादी कर घर भी बसाया, लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लगी. बांग्लादेशी नागरिक नजरूल इस्लाम वर्ष 1991 में बांग्लादेश से भारत की सीमा में घुसा. भारत में घुसने के बाद वह हावड़ा एक्सप्रेस के जरिए दून पहुंचा. यहां वह उस वक्त देवबंद में रहने वाले अपने मुंह बोले चाचा के साथ पहुंचा. देवबंद में एक-दो वर्ष पढ़ाई के बाद वह दून आ गया. दून में अपना ठिकाना बनाने के बाद नजरूल ने वर्ष 2001 में अपने गांव के सहफुल को दून बुला लिया. दून में रोहिंग्याओं के पकड़े जाते ही पुलिस अफसर सतर्क हो गए हैं तथा अब फिर सख्त सत्यापन अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है. दोनों गिरफ्तार आरोपियों के सोशल साइट एकाउंट खंगाले गए तो उसमें दोनों के कई बांग्लादेशी मित्र जुड़े मिले. इनमें कई से दोनों आरोपी नियमित संपर्क में रहते थे.

दोनो ने दून में लंबे समय तक रहकर सरकारी दस्तावेज बनाने की कोशिश की. लेकिन, शुरुआत में कामयाब नहीं हो पाए. इसके बाद दोनों ने शादी करने की योजना बनाई. भारतीय लड़की से शादी करते ही पहले दोनों ने अपनी-अपनी पत्नी के नाम का राशन कार्ड बनाया. इसके बाद दोनों की सरकारी दस्तावेज बनाने की राह खुली. दून में सहफुल ने वर्ष 2005 में और नजरूल ने 2007 में सहारनपुर जिले की दो सगी बहनों से शादी की. शादी के बाद अपनी-अपनी पत्नी के राशन कार्ड में दोनों का नाम चढ़ा. इसके बाद दोनों ने अन्य भारतीय दस्तावेज बनाने शुरू किए.

राशन कार्ड के बाद दोनों ने पहले मतदाता पहचान पत्र, फिर ड्राइविंग लाइसेंस और बाद में आधार कार्ड भी बनवा लिया. इतना ही नहीं अपने दस्तावेज के दम पर नजरूल ने वर्ष 2015 में पासपोर्ट बनाकर 2016 में उससे बांग्लादेश की यात्रा भी की. दोनों आरोपियों के दस्तावेज जुटाकर एलआईयू ने गहन सत्यापन किया तो उनके बांग्लादेशी होने की भनक लगी. इसकी पुष्टि होने के बाद दोनों को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया है.

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