खबर में दावा, एक अन्य प्रदेश में तो जजों और वकीलों को बांटी गई है कुरान.. वो भी अदालत के अंदर

हाल ही में झारखंड के रांची से एक ऐसी खबर आई, जिससे पूरा देश उबल पड़ा था. वो खबर थी जिसमें रांची कोर्ट द्वारा ऋचा भारती नामक एक हिन्दू युवती को जमानत लेने के लिए कुरान की किताबें बांटने का आदेश दिया गया था. हालाँकि बाद में कोर्ट ने अपना ये आदेश वापस ले लिया. लेकिन ये जो खबर है वो रांची की खबर से भी ज्यादा सनसनीखेज है. रांची में तो एक हिन्दू युवती को कुरान बांटने का आदेश दिया गया लेकिन एक अन्य प्रदेश में जजों तथा वकीलों को अदालत के अंदर कुरान बांटी गई हैं तथा ये कुरान इस्लाम के प्रचार के तौर पर बांटी गई हैं.

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मामला दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक का है. मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक, जिस दिन राँची की एक अदालत हिंदू लड़की ऋचा भारती को ज़मानत के लिए क़ुरान की 5 प्रतियाँ वितरित करने का आदेश दिया गया था, ठीक उसी दिन लगभग 2000 किलोमीटर दूर धर्मनिरपेक्ष भारत के ही एक राज्य कर्नाटक में इस्लामी धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा होता है. वो भी कहाँ, किसी मुहल्ले, बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर नही बल्कि कोर्ट में, सरकारी संस्थानों में.

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मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, दक्षिण भारत के एक राज्य कर्नाटक में सलाम सेंटर नामक एक इस्लामिक संगठन है. यह इस्लामिक संगठन ‘दवाह’ के लिए मशहूर है. दवाह मतलब वो इस्लामी प्रथा जिसमें गैर-मुस्लिमों को मुसलमान बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है. सलाम सेंटर की वेबसाइट के अनुसार, “वह कुरान गैर-मुस्लिम भाइयों और बहनों के बीच बाँटने का काम करता है. इसने हजारों लोगों के बीच इस्लाम, कुरान और पैगंबर मुहम्मद (PBUH) का प्रचार-प्रसार किया है.”  वेबसाइट में यह भी कहा गया है, “डॉक्टर्स, पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, आईटी प्रोफेशनल्स जैसों के बीच ‘कुरान सबके लिए’ का संदेश देने में उनका अभियान बेहद सफल रहा है.”

मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक़, सलाम सेंटर के संस्थापक और चेयरमैन सैयद हामिद मोहसिन ने कर्नाटक हाई कोर्ट में भी ‘दवाह’ किया और अदालत के भीतर वकीलों के साथ-साथ न्यायाधीशों को भी कुरान की प्रतियाँ बाँटीं. वह अपनी वेबसाइट पर कहते हैं, “कर्नाटक उच्च न्यायालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में कुरान वितरण के सफल कार्यक्रम के बाद मैंने यह सोचा कि क्यों न कुरान को व्यक्तिगत रूप से न्यायाधीशों और वकीलों को उनके कार्यालयों में जाकर पेश किया जाए. इस संबंध में जब मैंने कुछ मुस्लिम वकीलों के साथ चर्चा की, तो उन्होंने भी इस आइडिया पर सहमति जताई. हालाँकि कुरान की प्रतियों को न्यायाधीशों के कार्यलय में जाकर बाँटना कोई आसान काम नहीं है लेकिन मैंने चुनौती स्वीकारते हुए कहा, “कोशिश करनी चाहिए. यह अल्लाह का काम है, और अल्लाह निश्चित रूप से इस काम में हमारी मदद करेगा.”
मोहसिन ने हाई कोर्ट के जजों के साथ मीटिंग की पूरी कहानी वेबसाइट पर लिख रखी है. मोहसिन के अनुसार, जजों के साथ उनकी मीटिंग 12 दिनों तक चली. वह लिखते हैं, “माननीय न्यायाधीशों ने जब हमारे हाथों में कुरान देखा तो वे सम्मानपूर्वक उठ खड़े हुए, गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया. हमने उन्हें कुरान, पैगंबर मुहम्मद के जीवन पर एक किताब, मूल इस्लामी साहित्य और कुरान की डीवीडी दी. उन्होंने आदरपूर्वक हमें अपने बगल में बैठने की पेशकश की. उन्होंने बड़े ही सम्मान के साथ हमारे दिए उपहार को खोला और तुरंत कुरान पढ़ना शुरू कर दिया. फिर वे कुरान, पैगंबर मुहम्मद, इस्लाम और मुसलमानों पर बातचीत करने लगे.”
मीडिया सूत्रों के हवाले से आगे बताया गया है कि उन्होंने कोर्ट के पुस्तकालय में भी कुरान दिया गया. मोहसिन के अनुसार कुरान अब तक कोर्ट पुस्तकालय में नहीं थी. कई वकीलों और कोर्ट में कार्यरत कई अन्य अधिकारियों को भी कुरान वितरित की गई. एक वकील ने मोहसिन को कुरान के बारे में कुछ बताया, उसे भी वेबसाइट पर मजेदार ढंग से डाला गया है. वकील ने कहा, “मैंने पाँच दिन पहले आपसे कुरान प्राप्त किया था और इसे पढ़ गया. मुझे इसमें हिंदुओं के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला, जबकि हमें बताया गया था कि कुरान में केवल हिंदुओं के खिलाफ जहर है. हमें यह भी बताया गया था कि कुरान हिंदुओं के खिलाफ जिहाद के लिए कहता है. लेकिन कुरान में इस तरह का कुछ भी नहीं है. इसे पढ़ने के बाद मेरी गलतफहमी दूर हो गई है. अब मैं कुरान का गंभीरता से अध्ययन करूँगा और दूसरों की गलतफहमी को दूर करने की कोशिश करूँगा.”

मोहसिन ने अपनी वेबसाइट पर कुरान को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के गैर-मुस्लिम जजों द्वारा कही गई बातों को भी बड़े अनोखे अंदाज में लिख रखा है. इनमें से एक जज ने मोहसिन को बताया, “हाँ, मैं कुरान पढ़ना चाहता हूँ ताकि जान सकूँ कि अल्लाह ने पूरी मानवता को क्या संदेश दिया है. अगर कुरान में सभी मानवों के लिए संदेश है तो आपने इसे अब तक मानवता से दूर क्यों रखा?” एक अन्य जज ने मोहसिन से कहा, “मैं पिछले 10 वर्षों से देख रहा हूँ कि इस्लाम और मुसलमानों पर अत्याचार का स्तर बढ़ा है. अब इन अत्याचारों के निवारण के लिए आपको अगले 10 वर्षों तक कुरान को लोकप्रिय बनाना होगा. यह लगातार बड़े पैमाने पर किया जाना चाहिए, अन्यथा मुस्लिमों के लिए हालात बदतर हो सकते हैं.”

मोहसिन ने तो अपनी वेबसाइट पर यह भी दावा किया है कि वह कर्नाटक विधान परिषद में भी ‘दवाह’ कर चुका है. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कुरान देते हुए अपनी फोटो उसने वेबसाइट पर भी डाली है. सलाम सेंटर ने तो यहाँ तक कहा है कि उसने पुलिस विभागों में भी ‘दवाह’ करवाया है. एक जगह वेबसाइट पर लिखा गया, “सलाम सेंटर ने कर्नाटक राज्य पुलिस कर्मियों को पवित्र कुरान का संदेश देकर एक और उपलब्धि हासिल कर ली है. बहुत सकारात्मक परिणाम होने की संभावना है. इंशा अल्लाह!” और हाँ, केवल पुलिस विभाग ही नहीं, सलाम सेंटर कर्नाटक राज्य आंतरिक सुरक्षा खुफिया विभाग के मुख्यालय में भी कुरान वितरित कर चुकी है.

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