शतक लगने जा रहा हिंदूवादी नेताओं की ह्त्या का एक प्रदेश में.. जानिये कौन सा प्रदेश है वो जहाँ दिया जा रहा इतना बलिदान

ये वो प्रदेश है जहाँ की मुख्यमंत्री खुद को कथित सेक्यूलरिज्म का सबसे बड़ा ठेकेदार बताती है तथा लोकतंत्र का सबसे बड़ा रक्षक. ये वो प्रदेश है जहाँ कभी दुर्गा पूजा शोभायात्रा पर रोक लगाई जाती है तो कभी श्रीराम नवमी तथा हुनमान जयन्ती शोभा यात्रा पर हमले किये जाते हैं. ये सब यहीं समाप्त नहीं होता बल्कि स्थिति इससे भी कहीं ज्यादा भयानक है जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस राज्य में 100 के करीब हिंदूवादी तथा बीजेपी नेताओं की क्रूरतम तरीके से ह्त्या की गई हैं, कईयों के हाथ काटे गये हैं?

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हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल की. वो पश्चिम बंगाल जहाँ तृणमूल कांग्रेस पार्टी की सरकार है तथा ममता बनर्जी इस राज्य की मुख्यमंत्री हैं. यहाँ सवाल खडा होता है कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का झंडा उठाने वाले हाथों को काट देने की रवायत है क्यों ? ऐसा क्यों है कि राम का नाम लेने पर बंगाल में खून बहता है? जय श्रीराम कहने पर जान लेने की खूनी रवायत बंगाल की राजनीति का वो अक्स है, जो दिल्ली या मुंबई में बैठकर महसूस नहीं किया जा सकता लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि इस सबके बाद भी किसी भी कथित मानवाधिकारी, सेक्यूलर बुद्धिजीवी के कानों जूं तक नहीं रेंगती.

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पिछले काफी लंबे समय से बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्याएं होती रही हैं तथा इसका आरोप टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर लगता रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य में जहाँ टीएमसी लगातार कमजोर हो रही है तो वहीं मजबूत. हाल ही हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी में राज्य में जब 18 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की तो ममता के साथ ज्यादातर विपक्षी दल चौंक गये तथा शायद ममता को भी इस बात का एहसास हो गया कि बंगाल की जनता अब उनके कथित सेक्यूलरिज्म के बजाय बीजेपी के हिन्दू राष्ट्रवाद को स्वीकार करने लगी है.

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बंगाल में बीजेपी तथा हिंदूवादी नेताओं की ह्त्या की ऐसी जानकारी आपको देने जा रहे हैं, जिससे आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे. बंगाल में राजनीतिक हिंसा का सबसे नया मामला वर्धमान के केतुग्राम से सामने आया था जहां एक बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी, वो भी उसी दिन जब दिल्ली में मोदी सरकार दोबारा शपथ ले रही थी. बताया गया कि बीजेपी कार्यकर्ता सुशील मंडल देश में एक बार फिर मोदी सरकार बनने की खुशी में जगह-जगह पार्टी के झंडे लगा रहे थे तभी कुछ लोग आए और बीजेपी का झंडा लगाने का विरोध करने लगे.

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बहस हुई, बात बढ़ी और इसी दौरान चाकू से हमला कर दिया गया लेकिन सच बहुत डरावना है. मंडल की पत्नी ने बताया कि जय श्रीराम कहने पर सुशील मंडल की जान ले ली गई. यहीं सवाल खड़ा होता है कि ऐसा क्यों है कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का झंडा उठाने वाले हाथों को काट देने की रवायत है? ऐसा क्यों है कि राम का नाम लेने पर बंगाल में खून बहता है? जय श्रीराम कहने पर जान लेने की खूनी रवायत बंगाल की राजनीति का वो अक्स है, जो दिल्ली या मुंबई में बैठकर महसूस नहीं किया जा सकता.

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राजनीतिक मंचों से निकलने वाली रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के 80 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है. ये कुछ बरसों के दौरान हुई हत्याएं हैं. ममता बनर्जी अक्सर कहती रहती हैं कि बंगाल में राजनीति हिंसा नहीं होती लेकिन तस्वीरें, सूबत और गवाह सामने थे. मशहूर बांग्ला कहावत, जेई जाए लंका सेई होए रावण. यानी जो लंका जाता है वही रावण बन जाता है. कुछ इसी तर्ज पर सत्ता संभालने वाले तमाम दलों ने विरोधियों को खत्म कर देने वाले हथियार को धारदार ही बनाया है.

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आज ममता बनर्जी भले ही इनकार करें, लेकिन दीदी की सियासत भी लेफ्ट की हिंसा में झुलसकर ही निखरी थी. पश्चिम बंगाल की सियासी फिजा जमाने तक खून से रंगी रही. 21वीं सदी का बंगाल पहले लेफ्ट और टीएमसी और अब टीएमसी-बीजेपी के संघर्षों से लाल होता रहा है. लेफ्ट राज में 2001 में 21, 2002 में 19, 2003 में 22, 2004 में 15, 2005 में 8, 2006 में 7, 2007 में 20 और 2008 में 9 राजनीतिक हत्याएं हुईं लेकिन ये आंकड़ा अचानक 2009 में बढ़ गया जब राजनीतिक कत्लेआम की गिनती 50 तक पहुंच गई.

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ये वो समय था जब मां, माटी और मानुष के नारे के सहारे ममता बनर्जी बंगाल की सत्ता पर काबिज हो रही थी. 2010, 2011 और 2013 में राजनीतिक हत्याओं के मामले में बंगाल पूरे देश में अव्वल रहा. पश्चिम बंगाल की धरती पर राजनीति का ये ऐसा भयानक चेहरा है जिसकी कल्पना भर से रूह कांप उठती है. कभी बीजेपी का झंडा उठाने वालों के हाथ काट दिए जाते हैं, तो कभी विजय जुलूस पर बम फेंके जाते हैं, जैसा हुगली में हुआ. जैसे बशीरहाट में हुआ.

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अब ये स्थिति और खतरनाक होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं क्योंकि एकतरफ बीजेपी है जो जय श्रीराम के सहारे मिशन 2021 में जुटी है. भारतीय जनता पार्टी भगवा नारों के दम पर ममता को उन्ही के गढ़ में ललकार रही है लेकिन चिंता की बात ये है कि बंगाल का रक्त चरित्र आने वाले दिनों में किसी बड़े तूफान की दस्तक दे रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि बंगाल में बीजेपी मजबूत हो रही है तथा ममता दीदी की जमीन दरक रही है.

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