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उत्तर प्रदेश का ऐसा जिला जहाँ पुलिस खुद सडक पर करवाती है नमाज़.. बताती है कि- “मस्जिद छोटी है”

अगर आप योगी सरकार के माध्यम से पिछले कुछ समय से वायरल हो रहे एक आदेश कि अब सडक पर नहीं होगी कोई भी मजहबी कार्यो की अनुमति को ले कर खुश हैं तो यकीनन आपको इसका अधिकार है . शायद अब आप को आफिस जाते या अस्पताल आदि जाते जाम आदि के चलते देर न हो .. लेकिन आगे इतना कहना होगा कि काश ये आदेश पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ लागू हुआ होता , क्योकि एक जिला ऐसा भी है जहाँ खुद पुलिस ही तोड़ रही है इस नियम को .

वो नियम बाकायदा लिखित रूप से तोड़े जा रहे है .. ये जिला है बरेली जहाँ पर शायद DGP या मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश निष्प्रभावी माने जा सकते हैं . यहाँ पर थाना कोतवाली क्षेत्र में पुलिस की उदारता इतनी है कि नमाज़ के समय खुद से ही सडक के एक क्षेत्र में बैरिकेड लगा देती है और बाकायदा सुरक्षा के लिए सिपाही तैनात कर दिए जाते हैं और उसके बाद नमाज़ पढ़ी जाती है .. हैरत की बात ये है कि जब इसकी शिकायत की जाती है तो मिलता है बेहद अजीब जवाब .

यहाँ पर पुलिस खुद सडक पर नमाज़ पढने वालों की तरफ से पार्टी बन जाती है और जवाब देती है कि चूंकि मस्जिद छोटी है इसलिए ये नमाज़ सडक पर आयोजित करवाई जाती है . हैरत की बात ये है कि जगह के लिए जो पैरवी नमाजियों को करनी चाहिए जिला प्रशासन या वक्फ बोर्ड से वही पैरवी खुद बरेली पुलिस कर रही है और सडक पर नमाज़ होना कोई बड़ा विषय नहीं मानती है.. सवाल ये उठता है कि क्या ये शासन के आदेशो का उल्लंघन प्रशासन के ही द्वारा नहीं है ?

अभी हाल में ही नॉएडा में कई ऐसे पार्को को पुलिस ने बड़ी मेहनत से खाली करवाया जहाँ पर बाकायदा लाऊडस्पीकर आदि लगा कर नमाज़ शुरू हो गई थी . पुलिस के रोकने के बाद नमाजियों ने तर्क दिया था कि वो काफी समय से ऐसा कर रहे हैं तो उन्हें पहले क्यों नहीं रोका गया .. अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि प्रकरण में भी बाबरी के पक्षकारों ने ये दावा दिया है कि चूंकि उस स्थान पर मुस्लिम समाज बहुत पहले से नमाज़ पढ़ रहा है इसलिए उसका मालिकाना हक उन्हें मिले..

अब सवाल ये है कि क्या कल बाबरी और पार्को के लिए लागू किये नियम बरेली में भी नहीं अपनाए जायेंगे ? एक सवाल और भी उठता है कि अगर दुर्भाग्य से उसी समय किसी अन्य मत मजहब के व्यक्ति का वाहन ब्रेक फेल आदि के चलते नमाजियों के बीच में घुस जाए तो क्या यही बरेली पुलिस उन नमाजियों को ये समझाने में कामयाब हो जायेगी कि ये महज एक दुर्घटना थी जबकि रेल की सीट तक के झगड़े में गौरक्षक तक की अफवाह उड़ाई गई है .. नीचे देखिये नीचे वो ट्विट और वीडियो के साथ बरेली पुलिस का हैरत भरा जवाब .. –

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नोएडा 

मोबाइल – 9598805228

 

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