प्रेमिका सुभासिनी पर धुन सवार थी प्रेमी नसीम के नाम की.. भगवा गमछे वालों को वो भगा देती थी.. फिर मिली एक लाश

सुभाषिनी को बहुत समझाया था हिन्दू संगठनों ने लेकिन वो बार बार कहती रही कि तुम सबके दिमाग में जहर भरा है. वो कहती थी कि तुम सबको क्या पता की प्यार क्या होता है , इतना ही नहीं उसने कई बार गालियां दे कर भगाया उन भगवा गमछा वालों को जो उसको मजहबी संक्रमण तथा लव जिहाद के प्रति सचेत करते थे. उसके लिए धर्म-मजहब की बातें करना पागलपन था. वह हमेशा कहती थी कि ये हिन्दू संगठन समाज में नफरत फैलाते हैं, लोगों को आपस में लड़ाते हैं.

सुभाषिनी पर नसीम के प्यार की ऐसी धुन सवार थी कि वह उसके आगे किसी की सुनने को तैयार नहीं थी. वो एक अस्पताल में नर्स थी जहाँ उसकी नसीम से मुलाकात हुई, दोस्ती हुई तथा फिर प्यार हो गया. वह किसी भी हालात में नसीम के साथ रहना चाहती थी. नसीम के लिए वह अपने घर परिवार को भी छोड़ने को तैयार थी. फिर एक दिन वह दवा लेने जाने की बात कहकर घर से निकली तो फिर वापस नहीं लौटी बल्कि उसकी लाश मिली. दरअसल उसी ह्त्या की गई थी तथा ये ह्त्या किसी और ने नहीं बल्कि खुद नसीम ने की थी.

मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के थाना कुर्सी क्षेत्र के ग्राम नौहई मजरे बम्भरौली गाँव का है. खबर के मुताबिक़, गाँव के  रामदास यादव की 21 वर्षीय पुत्री सुभासिनी यादव 23 अप्रैल को घर से यह कहकर निकली थी कि वह दवा लेने लखनऊ जा रही है. शाम को उसने फोन करके अपने पिता को सूचना दी कि वह मुंशी पुलिया पर है. घर आ रही हूं आप परेशान न हो. काफी देर रात तक जब सुभासिनी घर वापस नही लौटी तो रामदास और उसके घर के सदस्यों ने सुभासिनी की तलाश शुरु की। लेकिन कहीं पर भी सुभासिनी का पता नही चला.

दो दिन बाद पीड़ित पिता ने थाना कुर्सी में जाकर अपनी बेटी की गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कराया. पुलिस ने जब इस सम्बन्ध में जांच पड़ताल शुरु की तो पुलिस को पता चला कि नौहई गांव के ही नसीम पुत्र आमीन का इस घटना के पीछे गहरा हाथ है. 12 की शाम को पुलिस ने नसीम को हिरासत में लिया और जब पुलिस ने कड़ाई से पूछतांछ की तो हैरान करने वाली हकीकत सामने आई. नसीम ने कबूल किया कि उसने सुभासिनी की हत्या कर लाश को कुंए में छिपा दिया है.

इसके बाद पुलिस ने पुलिस ने नसीम की निशादेही पर गांव से 600मी. दूर सुरसण्डा गांव के किनारे एक कुंए से पुलिस ने लाश बरामद की. थाना प्रभारी ने लाश का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया. पुलिस पूंछताछ में नसीम ने सुभासिनी की ह्त्या का जो कारण बताया वो उन मॉडर्न सेक्यूलर लडकियों की आँखों को खोलने वाला है जो प्यार में इस कदर अंधी हो जाती हैं कि उन्हें सही गलत का भी   ध्यान नहीं रहता.

नसीम ने बताया कि 24 अप्रैल को उसकी शादी थी लेकिन सुभाषिनी उसकी शादी का विरोध कर रही थी. इस पर नसीम 21 अप्रैल को इलाज के नाम पर उसे लखनऊ ले गया. इसके बाद शाम करीब साढ़े 4 बजे उसी के मोबाइल से उसने वीमेंस हेल्पलाइन 1090 पर कॉल करवाई. इसमें उसने कहलवाया कि उसके पिता उसे परेशान करते हैं. इसके लिए उसने सुभाषिनी को झांसा दिया कि इससे अगर वह उसके साथ भागती है तो उसके परिजन दवाब नहीं डाल पायेंगे. इसके बाद वह सुभासिनी को गाँव के बाहर ले गया तथा उसका मोबाइल स्विच ऑफ कर गला दबाकर उसकी ह्त्या कर दी तथा शव को कुए में फेंक दिया.

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