पूरी तैयारियां हो चुकी थीं निकाह की.. लेकिन काजी ने डाला ऐसा रोड़ा कि चौंक गये सब. आखिर काजी क्या चाहता था ?

वो मुस्लिम परिवार सांप्रदायिक सद्भाव को मानता तथा तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता का सन्देश देने के लिए उसने बेटी के निकाह के कार्ड पर हिन्दुओं के आराध्य प्रभु श्रीराम तथा जगतजननी माँ सीता की सीता की फोटो छपवा दी. मुस्लिम के निकाह पर हिन्दू आराध्यों का फोटो छपवाना उस काजी तथा तमाम अन्य इस्लामिक कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आया जो सार्वजनिक तौर पर हिन्दू मुस्लिम एकता की बात करते हैं तथा काजी ने निकाह पढ़ने से इंकार कर दिया.

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मामला उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के थाना अल्लाहगंज के गांव चिलौआ का है जहाँ के रहने वाले इबादत अली की 20 साल की बेटी रूखसार बानों की 30 अप्रैल को शादी होनी है. उन्होंने बेटी की शादी के कार्ड पर भगवान राम और सीता के फोटो छपवाए थे. लेकिन जब शादी के कार्ड उन्होंने अपनी रिश्तेदारों के घर बाटें तब इसकी काफी चर्चा इलाके में बात काजी तक पहुची तो उन्होंने शादी का निकाह ही पढ़ाने से इंकार कर दिया. काजी ने परिवार से कहा कि वह आला हजरत जाएं और वहां जाकर लिखित में माफी मांगे.

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बता दें कि देवबंद ने परिवार के खिलाफ फतवा भी जारी कर दिया है कि शादी के कार्ड पर राम-सीता की फोटो छपवाना गैर मजहबी है. फतवा जारी होने की सूचना परिवार को अखबारों से मिली है. अब परिवार को कुछ समझ नही आ रहा है कि वह क्या करें. परिजनों का कहना है कि बेटी की शादी के कार्ड पर भगवान के फोटो छपवा दिए है क्योंकि गांव मे हिंदू भाई है जिनको कार्ड देना थे. लेकिन कार्ड बाटते ही काजी ने निकाह पढ़ाने से इंकार कर दिया है, इससे उनका परिवार दुखी है.

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