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तुष्टिकरण की थी ऐसी लत कि कर्तव्यनिष्ठ पुलिस पर लगाया फर्जी आरोप.. बलिया पुलिस न्यायपथ पर

पहले तो विवाद भड़काओ और जब कुछ लोग लूटपाट करे तो आरोप पुलिस प्रशासन पर लगा दो। उस पुलिस प्रशासन पर जो दिन रात जाग कर सिर्फ और सिर्फ इस चिंता में महज कुछ मिनटों की नीद ले पाती है कि उसके इलाके में हर तरफ शांति कायम रहे और भले ही उसके लिए उसको पलक झपकने का भी अवसर न मिले .. विदित हो की बरेली उस दिन जल उठा जब मोटरसाइकिल और साइकिल के विवाद को तूल देकर मजहबी रंग में झुलसा दिया गया। अब इस बवाल के बाद बलिया के रतसर में पिछले दिनों हुई सम्प्रदायिक हिंसा में तमाम तथाकथित नेताओं और अगला चुनाव लड़ने की तैयारी बनाए छुटभैया लोगों के उकसावे पर कुछ लोगो ने अचानक ही प्रशासन पर ही आरोप मढ़ना शुरू दिया है .. 

पहले तो मजहबी समुदाय के लोगों ने मामले को तूल दिया और फिर साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ दिया उसके बाद दुकानों में लूटपाट किया और फिर दुकानों में आग लगाने का प्रयास करते हुए कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश की . पर पुलिस बेहद सतर्क और चौकन्नी थी और उसने तत्परता दिखाते हुए मज़हब के ठेकेदारों के हर मंसूबे नाकाम कर दिए और यही वजह बन गया उनके असंतोष का .. असल में पुलिस सदा से ही समाज के कुछ नकली ठेकेदारों का अपनी गलती छिपाने का एक साधन सा बन गयी है जिस पर वो अपने द्वारा फेंक दी गयी चीज को भी डकैती बता कर आरोप लगा दिया करते हैं … ऐसे लोग समय समय पर बेनकाब भी होते रहे हैं पर तब तक सम्बन्धित पुलिस अधिकारी को लम्बी मानसिक, कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया झेलनी पड़ जाती है . 

विदित हो की उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रतसर की ठठेरी गली, सदर बाजार, पकड़ी तर के तीन मकान-दुकान समेत दसियों दुकानों को पूरी तरह से लूट के बाद आतताइयों ने तहस-नहस करने का कुत्सित प्रयास किया था और इस विवाद को और अधिक तूल दे कर योगी आदित्यनाथ के शासन को बदनाम करने का प्रयास किया गया था पर पुलिस की तत्परता के चलते कोई भी मज़हबी ठेकेदार या आतताई अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया तो उन्होंने उस पुलिस पर फर्जी आरोप जड़ना शुरू कर दिया जो दिन रात जाग कर अथक मेहनत करते हुए जैसे तैसे सामजिक शांति को पटरी पर लाइ …  

किसी भी विवाद पर ये कट्टर मजहब वाले पहले तो विवाद खड़ा करते है और जब पुलिस वालें उनको पकड़ते है तो वो उल्टा मजहब का आड़ लेकर पुलिस के ऊपर आरोप मढ़ देते हैं। ऐसे आरोप पिछली सरकारों की तुष्टिकरण की नीतियों के चलते सफल भी हो जाया करते थे पर सत्ता के साथ प्रशासन ने भी अब ऐसे आरोपों पर ध्यान न दे कर केवल परित्राणाय साधूना विनाशाय च दुष्कृताम के नियमो को अपना लिया है और यकीनन प्रदेश का बदलता परिवेश इसका प्रमाण भी है . बलिया पुलिस की उसके अपराध नियंत्रण को ले कर पूरे प्रदेश में तारीफ़ हो रही है तब उस पर कुछ स्थानीय नेताओं द्वारा ऐसा आधारहीन आरोप लगाना यकीनन राजनीति के अंतिम स्तर तक गिरने जैसी बात होगी .. 

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