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आज अलग से खाना मांगा.. कल अलग से कुछ और तो नहीं मांग लोगे ? मदरसे से आखिर अब ये कैसी मांग ?

क्या ये अलगाववाद का नया तरीका है ? ये सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि अभी हाल ही में देशभर के तमाम बुद्धिजीवियों ने राग अलापा था कि भोजन का कोई धर्म नहीं होता. और जब भोजन का कोई धर्म नहीं होता तब आखिर मुख्यमंत्री कमलनाथ शासित मध्य प्रदेश के उज्जैन के मदरसों बने अलग भोजन की मांग क्यों की है? सवाल ये भी है कि आज मदरसों ने अलग से भोजन की मांग की है तो कल को कहीं ऐसा न हो कि मदरसे कुछ और भी अलग मांगने लगें.

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ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है तुष्टिकरण की आवाज जोर पकड़ने लगी है. इसी बीच राज्य के उज्जैन शहर में मदरसों ने सरकार से मिड डे मील के लिए अलग से व्यवस्था करने की मॉंग की है. मदरसों ने केंद्रीयकृत किचन से भोजन लेने से मना कर दिया है. इसके पीछे कारण दिया गया है कि वर्तमान की खाना देने वाली प्रणाली हिन्दुओं से सम्बद्ध है, इसलिए वह भोजन नहीं लेंगे.

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मदरसे के संचालक ने कहा है कि जो खाना मिल डे से दिया जाता है वह हिंदूओं के द्वारा बनाया जाता है इसलिए वह उसे नहीं लेना चाहते हैं. बात केवल यह नहीं है कि यहां हिंदूओं के द्वारा खाना बनाया जाता है इसलिए मदरसे ने लेने से मना कर दिया है बलि्क जो खाना यहां बच्चों को दिया जाता है उसका पहले हिंदू भगवानों को भोग लगाया जाता है उसके बाद वह बच्चों को दिया जाता है. मदरसे के प्रशासक का कहना है कि वह इसतरह से पूजा किया हुआ खाना न तो खुद ही खाएंगे न अपने यहां के बच्चों को खाने को देंगे.

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बता दें कि मौजूदा व्यवस्था के अनुसार सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में केंद्रीयकृत किचन से ही भोजन उलब्ध कराने का प्रावधान है. जिला पंचायत ने मदरसों की माँग पर प्रदेश शासन से राय माँगी है. वैसे, ये पहली बार नहीं है, जब उज्जैन के मदरसों ने अपने लिए अलग से मिड डे मील की माँग की हो. यहाँ के मदरसों ने मिड डे मील को लेकर पहले भी विरोध किया है और अपने लिए अलग से भोजन की व्यवस्था की माँग करते रहे हैं. अगस्त 2015 में उज्जैन के मदरसों ने यह कहकर भोजन लेने से इनकार कर दिया था कि भोजन बनाने वाली संस्था इस्कॉन हिन्दुओं का धार्मिक संगठन है.

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उन्होंने इस संस्था पर आरोप लगाया था कि भोजन बनाने के बाद उसे भगवान को भोग लगाया जाता है और इसमें गंगाजल मिलाकर स्कूलों में भेजा जाता है. इसके बाद 2016 में मध्यान्ह भोजन का ठेका इस्कॉन से लेकर माँ पृथ्वी साँवरी और बीआरके फूड को दे दिया गया, मगर फिर भी मदरसा समिति ने भोजन लेने से इनकार कर दिया, तभी से शहर के मदरसे मिड डे मील नहीं लेते हैं. उज्जैन जिला पंचायत के सीईओ ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि मदरसों में मध्यान्ह भोजन की अलग व्यवस्था करने की माँग जिला मदरसा समिति ने की है. मौजूदा प्रावधान के अनुसार यह संभव नहीं है. उनकी माँग पर क्या निर्णय लिया जाए, इस संबंध में शासन से अभिमत माँगा गया है.

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