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CBI से पहले भारतीय सेना का बंगाल में विरोध कर चुकी हैं ममता बनर्जी. कश्मीर के बाद दूसरा प्रदेश जहाँ हुआ था सेना का विरोध

यदि आप CBI के खिलाफ ममता बनर्जी का ये रूप देख कर हैरान हैं तो इतना जानना जरूरी है कि केन्द्रीय बलों का इस प्रकार से विरोध ममता बनर्जी द्वारा पहली बार नहीं हुआ है . संविधान बचाने की दुहाई देने वाली ममता बनर्जी इस से पहले भी केन्द्रीय बलों का विरोध कर चुकी हैं . यहाँ तक कि उनके चलते ही पश्चिम बंगाल कश्मीर के बाद दूसरा एसा प्रदेश बना था जहाँ पर भारतीय सेना का विरोध अधिकारिक रूप से एक मुख्यमंत्री द्वारा किया गया हो .

ये समय नवम्बर २०१६ का था जब भारतीय सेना की पूर्वी कमांड के अफसरों ने बाकायदा पश्चिम बंगाल की पुलिस की आधिकारिक अनुमति के बाद टोल नाकों पर अपना रूटीन अभ्यास किया था . जैसे ही ममता बनर्जी को इस मामले की जानकारी हुई वैसे ही उन्होंने इस मुद्दे पर हंगामा कर दिया और फ़ौरन ही सेना हटाने के लिए आन्दोलन करना शुरू कर दिया . यहाँ ध्यान देने योग्य है कि सेना को देख कर तमाम लोगों में सुरक्षा और अपनेपन की भावना आती है लेकिन ममता बनर्जी को ऐसा क्या हुआ था ये समझ के बाहर था .

उनका आरोप था कि उनको बताये और उनके द्वारा संचालित राज्य सरकार को बताए बिना भारतीय सेना तैनात कर दी गई है.ममता ने कहा था कि जब तक राज्य से सभी जगहों पर सेना नहीं हटाई जाती वो सचिवालय में ही रहेंगी. ममता के आरोप पर भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के कहा था कि पश्चिम बंगाल में टोल नाकों पर सेना की तैनाती पर राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार विवाद खड़ा कर रही है, जो ग़लत है. वहीं सेना के पूर्वी कमान ने भी ट्वीट कर कहा था कि ये “कार्रवाई एक रूटीन गतिविधि है और पश्चिम बंगाल की पुलिस की जानकारी में इसे किया जा रहा है”. ये कश्मीर के बाद दूसरा एसा प्रदेश था जहाँ पर भारतीय सेना के अनुशासित और सधे हुए सैनिको का विरोध किया गया था .

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