गरीबी के वोटों से मुख्यमंत्री बनी मायावती के जन्मदिन में दिखे सिर्फ अमीर ही अमीर

खुद को गरीबों का हितैषी बताने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती के 62वें जन्मदिन पर अमीर ही अमीर नजर आये. इस अवसर पर 62 किलो का शाही केक भी काटा गया. हमेशा गरीबी को मुद्दा बनाकर बात करने वाली मायावती के जन्मदिन पर गरीब लोगों को दूर रखा गया. दलितों और गरीबों के नाम पर उन्होंने हमेशा अपना घर भरा, और आज भी वो अपनी इसी निति पर चल रही है. दलितों को गरीबी से बहार निकालने के लिए मायावती उनसे बार-बार तमाम वादे करती है.

लेकिन आज भी दलितों की हालत जस की तस बनी हुई है. इससे साबित होता है कि बसपा सुप्रीमो सिर्फ दलितों के नाम पर राजनीति करती है.

सोमवार को अपने जन्मदिन पर मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया जिसमे उन्होंने सपा के खिलाफ कुछ न बोलते हुए बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधा. कहा कि देश में आरएसएस का राज चल रहा है और उसी के दिशा निर्देश पर केंद्र की मोदी सरकार काम कर रही है.

मायावती ने कहा की यदि दलितों का कोई विकास कर सकता है तो वह बहुजन समाजवादी पार्टी है. मायावती ने कहा कि दलित उत्पीडऩ के मामलों में कांग्रेस व भाजपा बराबर के भागिदार है. उन्होंने दोनों पार्टियों पर घिनौने हथकंडे व षडय़ंत्र से उनकी अंबेडकरवादी पार्टी को कमजोर और खत्म करने का भी आरोप लगाया है।हालाकि इससे पहले भी मायावती ने कई बार अपनी राजनीति चमकाने के लिए बिपक्षी दलों पर हमला किया है.

 

मायावती ने इस अवसर पर खुद की लिखी ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा (ब्लू बुक) के 13वें भाग के हिंदी व अंग्रेजी संस्करण का भी विमोचन किया. उनके जन्मदिन को पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने देशभर में जन-कल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया. वहीँ पार्टी कार्यकर्ताओं ने पूर्वांचल में भी धूमधाम से उनका बर्थडे सेलिब्रेट किया। कार्यकर्ताओं ने केक काटकर अपनी नेता के दीर्घायु होने की कामना की।  

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