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अब तो कांग्रेस को शरद पवार ने भी दिखाई आँखें… महाराष्ट्र में कांग्रेस बैकफुट पर

कांग्रेस पार्टी को एक के बाद के झटके मिलते जा रहे हैं.  एक तरफ जहाँ मायावती कांग्रेस को आँखें दिखा रही हैं तो वहीं एनसीपी ने बेहे ऑंखें तरेरना शुरू कर दिया है, जिसके कारण महाराष्ट्र में कांग्रेस बैकफुट पर पहुँच गई है. कांग्रेस के कमजोर संगठन और चुनाव की नज़दीकी देखकर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता शरद पवार भी कांग्रेस को आंख दिखाने लगे हैं. पवार ने साफ कर दिया है कि वो कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में अगला विधानसभा चुनाव तभी लडेंगे, जब विधानसभा में 50-50 का फॉर्मूला हो. पवार ने ये भी कह दिया कि कांग्रेस के 41 विधायक चुनकर आए और एनसीपी के 40. यानी अब दोनों पलड़ा बराबर है.

बता दें कि कांग्रेस और एनसीपी में 1999 में समझौता हुआ था. उसके बाद से महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 सीटों में से कांग्रेस 171 पर और एनसीपी 117 चुनाव लड़ती रही. ये फॉर्मूला बीजेपी-शिवसेना का भी था. लेकिन, पिछले चुनाव में चारों पार्टियां अलग-अलग लड़ी, जिसमें बीजेपी 123 सीट लेकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई. इसलिए शिवसेना बीजेपी में बन नही रही. अब बीजेपी भी साफ कह चुकी है कि सीट शेयरिंग पर नये तरीके से बात होगी.
शरद पवार को समझ में आ गया है कि यही सही मौका है. ऐसे वक्त में जब कांग्रेस और राहुल गांधी हर हाल में मोदी को हराना चाहते हैं, तो सीट शेयरिंग को लेकर एनसीपी भी बढ़िया बारगेनिंग कर सकती है. इस स्थिति में अब कांग्रेस फंस गई है. पार्टी पवार से अलग भी नहीं हो सकती और इस ‘दोस्ती’ को आगे बढ़ाना भी मुश्किल लग रहा है.

एनसीपी की इस शर्त पर कांग्रेस के पुराने नेता चंद्रकांत दायमा कहते हैं, ‘कम सीटों पर लड़ने का नुकसान कांग्रेस को ही होगा. एनसीपी कभी भी 70 सीट का आंकड़ा नहीं छू पाई. अगर कांग्रेस के कम नंबर आए, तो एनसीपी फिर सीएम पद पर दावेदारी ठोक देगी. हो सकता है कि एनसीपी शिवसेना जैसे क्षेत्रीय दल के साथ भी चली जाए. ऐसे मे कांग्रेस को अगर पवार की बात माननी भी है, तो कम से कम ऐसी सीटों की पहचान कर लेनी चाहिए, जो कांग्रेस जीत सकती है. पूरा खेल सीट बंटवारे पर ही है.’
कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र में सीटों का आकंड़ा लोकसभा चुनाव में भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है. कांग्रेस अब तक महाराष्ट्र के 22 सीटों पर और एनसीपी 16 सीटों पर चुनाव लड़ती रही है. पिछले चुनाव में कांग्रेस के दो कैंडिडेट जीते, जबकि एनसीपी के चार कैंडिडेट्स जीतकर लोकसभा पहुंचे. ऐसे में जाहिर है अब पवार वहां भी सौदेबाजी कर सीट बढ़ा सकते हैं.
यही नहीं, कांग्रेस के अलावा शरद पवार अलग से समाजवादी पार्टी, रिपबलिकन पार्टी, शेतकरी कामगार पार्टी जैसे दलों को भी साथ लेना चाहते हैं. जिनकी सीटें भी कांग्रेस के कोटे से ही जाएगी जिसे स्वीकारने में कांग्रेस हिचक रही है. कांग्रेस को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वह क्या करे.

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