घायल सिंह बनकर निहत्थे ही टूट पड़ा भारत का वो वीर नक्सली बने उन 4 दरिंदों पर और लिख दी वीरता की नई गाथा

महारष्ट्र के गढ़चिरौली में जवान गोमजी मात्तामी ने वीरता की एक नयी मिशाल पेश की हिई है. गोमजी मातात्मी पर 4 माओवादियों ने हमला किया लेकिन भारतमाता के सपूत गोमजी मात्तामी ने वीरता तथा सहस के दम पर चारो माओवादी नक्सलियों को खदेड़ दिया तथा उनके हथियार भी गिरा लिए. गोमजी मात्तामी की इस वीरता के लिए पूरा पुलिस विभाग उन्हें सेल्यूट कर रहा है.

खबर के मुताबिक गोमजी मत्तामी सी-६० कमांडो पुलिस में तैनात हैं. रविवार को चार माओवादियों ने उन पर हमला कर दिया जहां घायल होने के बाद भी ये जवान उनसे भिड़ गया और उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया. माओवादी गोमजी मातामी की ऐके-47 छीनकर ले जाना चाहते थे लेकिन वीर मात्तामी ने अपनी एके 47 रायफल कस के पकड़ रखी थी. घायल होने बाद भी उन्होंने अपनी रायफल नहीं छोडी बल्कि वो वीरता दिखाई कि माओवादी अपने हथियार छोडकर भी भाग गये. माओवादियों ने उनके माथे पर गोली भी चलाई लेकिन उन्होंने अपनी चतुराई से स्वयं को बचा लिया.

घायल गोमजी मात्तामी को औरेंज सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (ओसीएचआरआई) अस्पताल में भर्ती कराया गया है. गोमजी ने बताया है कि जिस समय मुझ पर हमला हुआ जब तक मैं कुछ समझ पाता, हमलावरों ने मुझे जमीन पर गिरा दिया और मुझे घेर लिया. उनमें से एक ने अपनी पिस्टल से गोली मारनी चाही लेकिन वो पिस्टल अचानक ही अटक गई जिसकी वजह से मेरी जान बच गई. हालांकि उन्होंने मुझसे जमकर मारपीट की। जिसमें मैं घायल हो गया.

गोमजी मत्तामी ने जिस तरह से अपनी रायफल को बचाया अपनी जान बचाई तथा माओवादियों के हमले को विफल किया उसके लिए उनका नाम वीरता पुरस्कार के लिए भेजने पर वहां का पुलिस विभाग विचार कर रहा है. गोमजी मात्तामी पहले भी कई एनकाउंटर कर चुके हैं तथा उनके साथी उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से पुकारते हैं.

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