इलाहाबाद का SI शैलेन्द्र सिंह बना देना चाहते थे बिजनौर के SI अभितेंद्र को. हमला भी किया और कार्यवाही भी मांग रहे. जबकि न्याय पथ पर थी पुलिस

जब कोशिशें रामराज्य की हो रही हों , जब सारे प्रयास सिर्फ सिर्फ कानून के राज के हो रहे हों तब अगर ये विषम हालात हो तब जरा उस समय के हालात सोचने लायक हैं जब एक ही पक्ष को बढ़ावा देने के आदेश रहे होंगे और तुष्टिकरण के चलते उन जांबाज़ अधिकारियो के बेअसर तेवर भी याद करने लायक हैं . यहाँ बात चल रही है हमारी रक्षा करने वाली पुलिस की को फिलहाल बिजनौर में बहस का मुद्दा बनी हुई है ..

विदित हो कि पुलिस वालों की कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल खड़े करने और उन पर कीचड़ उछालने के तमाम प्रयास खास कर पश्चिम उत्त्तर प्रदेश में किये गए जिसमे रामपुर में पुलिस सब इंस्पेक्टर पर झूठा महिला द्वारा आरोप , बिजनौर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी सिपाही कमल शुक्ला पर बलात्कार का झूठा आरोप लगा कर कई दिनों तक हंगामा आदि ऐसे मामले रहे हैं जो कर्तव्यनिष्ठ पुलिस पर मात्र अपनी जहरीली सोच के चलते कीचड़ उछालने के कुत्सित प्रयास भर थे .. जैसे तैसे आतंकवाद , अपराध , नक्सलवाद से लड़ती पुलिस अपने ऊपर लगे इस आरोप से मुक्ति पाती है .. एक बार फिर इसी प्रकार से बिजनौर के पीपला जागीर प्रकरण में एक पुलिस सब इंस्पेक्टर व् उनके दो हमराह सिपाहियों पर फिर से उनके द्वारा निशाना साधा गया है जो खुद ही हैं किसी न किसी रूप में जिम्मेदार ..

ज्ञात हो कि बीते बुधवार को बिजनौर के नूरपुर से सटे गांव पीपला जागीर में तीन बुग्गी मिटटी को अवैध तरीके से भर कर ले जाते समय पुलिस ने रास्ते में रोक लिया . पुलिस की इस टीम में सिपाही विशाल और महबूब शामिल थे.. जब खुद को फंसता देखा तो मिटटी ले जा रहे लोगों ने इसको मज़हबी रंग दिया और बताया कि इस मिटटी का उपयोग मस्जिद में भराव के लिए किया जाएगा .. फिर भी क़ानून को हर मत और सम्प्रदाय के ऊपर रखने के निर्देश और सोच पर चल रहे पुलिस के सिपाहियों ने किसी दलील को नहीं माना और बवाल बढ़ता गया . इसी बीच इस चौकी के इंचार्ज श्री अभितेन्द्र सिंह जी वहां पहुंच गए और उन्होंने मामले को समझा बुझा कर टालने की कोशिश की .

सारी बातें सकारत्मक रूप से ही चल रही थी कि अचानक भीड़ में से कई कट्टर मज़हबी सोच वालों ने पुलिस को भी भद्दी भद्दी गलियां देना शुरू कर दिया और ठीक कश्मीरी अंदाज़ में मारपीट पर उतारू हो गए .. पुलिस ने अपनी तरफ से पूरे धैर्य और संयम का परिचय दिया फिर भी भीड़ में मौजूद कट्टर मज़हबियो की बदतमीजी बढ़ती ही जा रही थी . हालत ये हो गए कि चौकी इंचार्ज श्री अभितेन्द्र को आत्मरक्षा में एक दुकान के अंदर जाना पड़ा पर उन कट्टरपंथियों का दुस्साहस इतना था कि वो उस दूकान तक चढ़ कर चले आये और ठीक वही हालत बनाने लगे जो २ साल पहले इलाहाबाद की अदालत में सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के साथ बने थे और उनके द्वारा आत्मरक्षा मे किये गए फायर में हुई नबी अहमद की मौत हुई जिसके चलते उन्हें आज तक जेल में कैद रहना पड़ा है और उनका परिवार आर्थिक व् सामाजिक रूप से टूटने की कगार पर है .. पर इस मामले में चौकी इंचार्ज श्री अभितेन्द्र सिंह ने धैर्य रखा और अपनी जान बचाने के लिए आत्मरक्षार्थ फायर किया जिसमे किसी को भी निशाना नहीं बनाया गया था ..

ये उस प्रभारी का सौभाग्य रहा कि अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और उसने हालत संभाला लिया वरना यकीनन मज़हबी भावनाओ में उन्मादी भीड़ में छिपे वो आपराधिक तत्व चौकी प्रभारी की जान लेने पर आमादा थे .. इस घटना के बाद हुए हंगामे में मात्र वर्ग विशेष को खुश करने की नीयत से दोनों सिपाहियों और चौकी प्रभारी श्री अमितेन्द्र को उनके चार्ज से मुक्त कर के लाइन हाजिर कर दिया गया जबकि आत्मरक्षा का अधिकार भारत के प्रत्येक व्यक्ति को संवैधानिक रूप से प्राप्त है . सिपाहियों और इंचार्ज पर लगाया अवैध वसूली का कोई भी आरोप किसी भी रूप से साबित नहीं हो पाया है जबकि आये वीडियो में ही भीड़ की तरफ से कई लोग उन्मादी नारे और भद्दी भद्दी गलियां देते आगे बढ़ते दिख रहे हैं जबकि चौकी इंचार्ज अमितेन्द्र उनसे खुद ही दूरी बनाते दिख रहे थे .

हद तो तब हो रही है कि इस मामले में तमाम मीडिया और कई न्यूज वाले उन्ही उन्मादी तत्वों के साथ खड़े हो गए और कर्तव्य मार्ग पर चल रही पुलिस के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया जबकि आये वीडियो में साफ़ है कि दोष किसका है … पुलिस के मनोबल पर पहली कार्यवाही कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी अभितेन्द्र को लाइन हाजिर कर के ही हो गई और आगे और बड़ी कार्यवाही मांगी जा रही है .. ये भी जानना जरूरी है कि उन आपराधिक तत्वों के खिलाफ कोई एक शब्द नहीं बोल रहा जिन्होंने पहले तो अवैध रूप से मिटटी की खुदाई की और बाद में पुलिस पर हमला भी किया …खनन मंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी प्रकार की अवैध खनन पर पुलिस कार्यवाही करे , यदि वही तीन बुग्गी मिटटी किसी ने वीडियो बना कर ये कहते हुए डाल दी होती कि नूरपुर इलाके में चल रहा है अवैध खनन तो यकीनन इसमें चौकी इंचार्ज अभितेन्द्र को निशाना बना लिया गया होता और कार्यवाही भी सम्भव थी , तो अपने कर्तव्य का निर्वाहन करने वाले अधिकारी पर लाइन हाजिर की कार्यवाही क्यों ?

हद तो ये है कि उन तमाम मज़हबी उन्मादियों पर एक भी शब्द न बोलने वाला और केवल पुलिस को कटघरे में खड़ा करता एक दल और कड़ी कार्यवाही करवाने के उद्देश्य से DIG आदि से मिलने बरेली जा रहा है …सुदर्शन न्यूज बेहद विषम हालत में भी समाज की रक्षा कर रही पुलिस के कर्तव्यनिष्ठ सिपाहियों के जज़्बे को सलाम करता है और आशा करता है कि क़ानून के इन रक्षको के साथ किसी भी दबाव में अन्याय नहीं होगा ..  और यदि किसी भी मत , मज़हब के दबाव में कोई निर्णय आया तो इसके सभी मूल सत्य तथ्यों के साथ सुदर्शन न्यूज राज्य शासन से केंद्रीय सत्ता तक वास्तविकता को पंहुचा कर न्याय की मांग करेगा … 

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