मोहम्मद साद बन गया धर्मवीर और बोला “हर हर महादेव”…. जनता बोली – “स्वागत है”

आखिर वो दिन अब करीब आ ही गया हैं जिसका हिंदू समूदाय के लोगों को बड़ी बेशबरी से इंतजार था। आखिर खास मजहबी लोगों को हिन्दू समूदाय

ने मात दे ही दी। कहते हैं दिन का भूला अगर रात तो घर वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते। जी हां एक ऐसी ही की गई गलती को सुधारा हैं धर्मवीर ने ।

आपको बता दे कि पांच साल पहले धर्मवीर ने इस्लाम अपना कर अपना नाम मोहम्मद शाद कर लिया था। अब फिर से शाद ने आर्य समाज मंदिर में घर वापसी

करते हुए परिवार के साथ हिंदू धर्म अपना लिया।

धर्मवीर ने बताया कि उसे और उसके परिवार को नए धर्म के लोगों द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा था,

उन्हें कोई मुस्लिम मानने को तैयार ही नहीं था। अंत में हारकर उन्होंने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली। इस काम में विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस ने

धर्मवीर का सहयोग किया। आपको बता दे 55 वर्षीय धर्मवीर गंगोह के कोटला के रहने वाले एक कारोबारी हैं और जाट समुदाय से हैं। धर्मवीर ने बताया कि 2012

में उन्होंने परिवार के साथ मुस्लिम धर्म अपना लिया था।

उन्होंने अपना नाम धर्मवीर से मोहम्मद शाद, पत्नी ममता का नाम मरियम और बेटी शिवानी का नाम

जैनब रखा गया था। बेटे सौरभ और राहुल का नाम शोएब तथा राशिद हो गया। धर्मवीर ने बताया कि काफी दिनों से वह खुद को इस्लाम में असहज महसूस कर

रहा था। इसके अलावा उनके पड़ोस में रहने वाले कुछ मुस्लिम उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। इन सब बातों से परेशान होकर धर्मवीर ने परिवार के साथ

 आर्यसमाज मंदिर में धार्मिक विधि-विधान से घर वापसी करते हुए फिर से हिंदू धर्म अपना लिया।

उन्होंने कहा कि घर वापसी में विश्व हिंदू परिषद और

आरएसएस की मदद ली। जिन्होंने एक ‘अनुक्रिया रस्म’ का आयोजन किया। वीएचपी के जिलाध्यक्ष मांगेराम ने बताया कि कुछ समय पहले धर्मवीर ने उनसे संपर्क

किया था और घर वापसी की इच्छा जताई थी। ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स की दुकान चलाने हुए धर्मवीर ने कहा, ‘मैंने अपने पिता विजय पाल के साथ मतभेदों के

बाद 2012 में अपने परिवार के साथ इस्लाम को गले लगाने का फैसला किया था।

तब से मैं इस्लाम के हर रिवाज को मानता था और पांचों वक्त की नमाज अता

किया करता था।धर्मवीर ने बताया कि उनका एक पड़ोसी आसिफ उनकी बेटी को परेशान किया करता था। आखिर में परेशान होकर बेटी ने घर छोड़ दिया।इसकी

शिकायत उन्होंने मुस्लिम समुदाय से शिकायत की मगर किसी ने उनकी कोई मदद नहीं की। इन बातों से परेशान होकर छह महीने पहले से ही परिवार ने नमाज

अता करना छोड़ दिया था।

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