भीख मांगने की कगार पर आ गए वो पत्थरबाज जो पत्थरबाज़ी को समझ बैठे थे नौकरी…

अलगाववादियों के खिलाफ केंद्र के सिकंजा कसते ही पत्थरबाजों के भी पत्थरो में कमी नज़र आ रही हैं. जो पथरबाज बात बात पर सेना पर पत्थर बरसाते थे

आज वो खामोश हैं. जिन पथरबाज़ो के पत्थर को अलगाववादी कश्मीरीओ पर जुल्म का कारण बताते हैं आज उन्ही अलगाववादी नेताओ के बगैर वह शांत हैं.

एनआईए ने जब से छापेमारी की हैं उसके बाद से कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी देखने को मिली। सुरक्षाबलों का कहना है कि “पिछले कई महीनों के

मुकाबले पत्थरबाजी की घटना में कमी दर्ज हुई है”. उनके अनुसार घाटी में एनआईए की छापेमारी के बाद से टेरर फंडिंग पर प्रभाव पड़ा है, जिसके चलते इन

घटनाओं में भी कमी दर्ज हुई है. बता दें कि घटनाओं में कमी का कारण पत्थरबाजों को मिलने वाली दिहाड़ी में कमी हैं.

छापेमारी और अलगाववादी नेताओ की गिरफ़्तारी के बाद से जिन लोगो के माध्यम से पत्थरबाजों तक पैसे पहुंचाए जाते थे उनमे से कई को अब पैसो की उपलब्धता नहीं हो पा रही हैं. एक और अलगाववादी नेता यह सफाई दे रहे हैं कि उन्होंने पत्थरबाजों को पैसे देने और आतंक फ़ैलाने के लिए पाकिस्तान से कोई पैसा नहीं लिया वही उनकी गैरमौजूदगी में घाटी में पत्थरबाजी की घटना में कमी नज़र आ रही हैं. जो अलगाववादी नेताओ की दलीलों को जुठ साबित कर रही हैं. 

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