“में बेटी हूँ मां क्या मेरा यही दोष था?” ये सवाल मां के लिए नहीं बल्कि दुनिया के लिए है जिसे मरने पर मजबूर किया जिहादी दानिश ने

एक ऐसी सोच भी है जो कभी धार्मिक स्थलों पर बम ब्लास्ट करती है जिसमें कई लोगों की जानें जाती हैं? ये सोच यहीं नहीं रुकती बल्कि इससे आगे बढ़कर आपके परिवार की इज्जत पर हमला करते है, आपके परिवार की महिलाओं, बहिन-बेटियों की अस्मिता को लूटने का प्रयास करती है. अफ़सोस फिर भी ये लोग खुद को सुधारवादी बताते हैं और अगर कोई इन पर प्रश्न उठाता है तो ये कहते हैं कि इनकी आजादी पर हमला हो रहा है इनको शक की नजरों से देखा जा रहा है.

ऐसी ही मजहबी उन्मादी दुराचारी सोच का शिकार मध्य प्रदेश के भोपाल की एक युवती हुई है जिसने छेड़छाड़ से तंग आकर फांसी लगाकर जान दे दी. खबर के मुताबिक भोपाल के गौतमनगर के दुर्गा मंदिर गली में रहने वाली 19 वर्षीय बी.कॉम. द्वितीय वर्षीय की छात्रा आरती रॉय को कॉलेज जाते समय एक “दानिश” नाम का युवक छेद्छाड़ करता था. पिछले 1 महीने से वह बहुत ज्यादा परेशान कर रहा था तो युवती ने अपनी माँ को इस बारे में बताया भी था. जिसके बाद आरती को उसकी मौसी के लडके कॉलेज छोड़ने जाने लगे.

लेकिन शनिवार को आरती अकेली ही गयी थी क्योंकि उस दिन उसकी मौसी के बेटे घर पर नहीं थे. तभी रस्ते में दानिश ने आरती के साथ फिर से छेड़छाड़ की, मारपीट की तथा उसके पैर पर स्कूटी चढ़ा दी. चोट लगने के बाद घर आ गयी तथा अपनी माँ से कहा कि “माँ क्या बेटी होना पाप है, बेटी होना कलंक है?”. इसके बाद अपने कमरे में जाकर फांसी लगाकर जान दे दी.

अभी कुछ दिन पहले ही हमने महिला दिवस मनाया है. लेकिन क्या महिला सशक्तिकरण केवल कहानियों तक ही सीमित होकर रहेगा. अगर आज भी हिन्दुस्तान में किसी होनहार लड़की के जहन में अपने  ‘कलंक’ होने का सवाल उठता है तो निश्चित रूप से यह हमारे समाज के लिए ‘कलंक’ से कम नहीं है. शासन प्रशासन चाहे महिला सुरक्षा के कितने ही दावे कर ले, लेकिन इस जमीनी हकीकत को हम कैसे झुठला पाएंगे कि दानिश जैसे दरिन्दे लोग आज भी मौजूद हैं जो आरती जैसी  देश की बेटियों को जान देने पर मजबूर कर रहे हैं .

हमारे समाज की बेटियां खुद को महफूज महसूस करें, ये जिम्मेदारी उनकी नहीं हमारी है. बेटियों को हमें इतना मजबूत बनाना होगा कि ऐसे ‘दरिंदों’ के खौफ से खुद को मिटाने का कदम उठाने के बजाए डटकर मुकाबला करें लेकिन इसके लिए हमें ही आगे आना होगा तथा दानिश जैसे लोगों को अपने समाज में पनपने ही नहीं देना है. हमें याद रखना होगा कि दानिश के आज आरती ने ये सोचा कि “क्या बेटी होना पाप है” और अपनी जान दे दी लेकिन कल को यही दानिश हमारी व आपकी बहिन बेटियों को ऐसा खौफनाक कदम उठाने  पर मजबूर कर सकता है. अगर आप भी किसी बेटी के बाप हैं किसी बहिन के भाई हैं तो आरती के आखिरी सवाल का जवाब आपको भी देना चाहिए कि “क्या सच में बेटी होना पाप है, बेटी होना गुनाह है?”

आरती के फांसी लगाकर जान देने के बाद दानिश फरार है तथा अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. अब ये मध्य प्रदेश पुलिस तथा भोपाल पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि दानिश को गिरफ्तार करके न सिर्फ छेड़खानी बल्कि आरती की ह्त्या के जुर्म में फांसी की सजा देनी चाहिए. निश्चित रूप से ये आरती की आत्महत्या नहीं बल्कि आक्रान्ता दानिश द्वारा की गयी ह्त्या है जी हाँ ये एक हत्या है. तथा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी को इस घटना पर संज्ञान लेकर दानिश को सजा दिलानी चाहिए क्योंकि वो स्वयं को राज्य की बेटियों का मामा कहते हैं और अब जरूरत है उन्हें अपना मामा का धर्म निभाने की.


 

रिपोर्टर- अभय प्रताप सिंह चौहान

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