कभी चंबल का दुर्दांत डाकू रहा मलखान सिंह बन्दूक छोड़ उतर आया एक राजनैतिक पार्टी के साथ.. बोला- “यही है वो दल जो बदल सकता है भारत को”

मलखान सिंह.. 70 के दशक में चबल के बीहड़ों में ये नाम एक खौफ का पर्याय था. मलखान सिंह के नाम से बड़े से बड़े सूरमा कांपते थे. मध्य प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था मलिखान सिंह क्योंकि मलिखान सिंह ने अनुसार उसने मध्य प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बगावत की थी तथा फिर ऐसी बगावत की कि सरकार क्या उनके अधिकारी तक मलिखान सिंह के नाम से कांपने लगे. अब मलिखान सिंह ने एलान किया है कि वह बुलेट नहीं बल्कि बैलेट का सारथी बनेगा. अब उसकी बन्दूक नहीं बल्कि उसकी आवाज गूंजेगी. आपको बता दें कि मलिखान सिंह ने अब भाजपा का साथ देने का एलान कर दिया है तथा कहा है कि भाजपा ही वह दल है जो राष्ट्र का कल्याण कर सकती है.

छह: फीट लंबा कद…रौबदार चेहरा…गठीला बदन…शेर की तरह दहाड…चेहरे से बाहर निकलती मूंछें…खाकी वर्दी…एक हाथ में अमेरिकन सेल्फ लोडिंग राइफल तो दूसरे हाथ में लाऊडिस्पकर. 70 के दशक में ये चेहरा खौफ की तस्वीर बना रहा. चंबल के शेर के नाम से पहचाने जाने वाले इस खूंखार डाकू का नाम मलखान सिंह था…1983 तक चंबल के बीहडों में राज करने वाले डाकू मलखान सिंह पर 185 लोगों की हत्या करने का आरोप था. लेकिन ये आरोप ही था, इसकाबी पुख्ता प्रमाण नहीं था. साल 1983 में अर्जुन सिंह की सरकार में भले ही मलखान सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया लेकिन आज भी चंबल इलाके में मलाखान सिंह का रसूख कम नहीं है. अब फिर मलाखान की दहाड चंबल-ग्वालियर इलाके में गूंजेगी.  इस बार मलखान की दहाड बगावती नहीं बल्कि खुद सरकार की आवाज ही इन दहाडों में गूजेंगी. मलखान सिंह रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ गुना में मंच साझा करते दिखाई दिए.

मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा रविवार को जब गुना पहुंची. गुना के मंच पर मुख्यमंत्री की दूसरी पंक्ति में पूर्व डकैत मलखान सिंह बैठे दिखाई दिए. मलखान सिंह का मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करना यह साबित करता है कि अब बीजेपी मलखान के आसरे अपनी चुनावी बिसात ग्वालियर-चंबल में बिछाएगी. मलखान सिंह ने कहा कि 50 सालों तक कांग्रेस ने ऐसे हालात बना दिए थे कि वे ही नहीं कई लोग चंबल के बीहडों में बागी बने. पिछले 15 सालों में शिवराज की सरकार में एक भी सूची बद्ध गिरोह नहीं है. मैं अर्जुनसिंह की इज्जत करता हूं लेकिन शिवराज सिंह अच्छा काम कर रहे हैं. उनकी भाषा-शैली मुझे बहुत पसंद है तथा काम करने का तरीका भी. वे धार्मिक काम कर रहे हैं. इस चुनाव में मैं जाऊंगा और लोगों को जोडूंगा. मलखान सिंह ने कहा कि मैं डाकू नहीं बल्कि बागी रहा हूँ. मैं डकैत नहीं था बल्कि मैंने बगावत की थी तत्कालीन सरकार की अंतहीन तानाशाही के खिलाफ. मैं अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लडाई लडता हूं. बागी हुआ था तब भी लडाई लडी थी और अब भी लडाई लडूंगा. मैं टिकट का लालसी नहीं हूं बल्कि मैं तो टिकट मिलने वालों के लिए प्रचार करूंगा तथा राष्ट्रहित में मध्यप्रदेश हित में भाजपा को जिताऊंगा.

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