बेटे की लाश छोड़कर उसे ले कर आये फौजियों से लिप्त गई माँ और बोली- “तुम भी मेरे ही बेटे हो”

एक माँ के फ़ौजी बेटे ने अपने देश हिन्दुस्तान के लिए, भारतमाता की रक्षार्थ लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया. इसके बाद जब भारतमाता के लाड़ले बेटे का शव जब जब उसके घर पहुंचा तो उसके परिवार सहित पूरा क्षेत्र आंसुओं के सागर में डूब गया तथा भारतमाता की जय के नारों के साथ अपने वास्तविक नायक को अंतिम विदाई दी. इसके बाद शहीद की मां ने जो कहा उसे सुन आप भी उस मां को नमन किये बिना नहीं रह पाएंगे. शहीद की माँ ने कहा कि मेरा बेटा शहीद हो गया तो क्या हुआ सीमा पर तैनात सारे जवान मेरे बेटे हैं. आज जो सैनिक मेरे बेटे के शव को लेकर आये हैं वो भी मेरे बेटे हैं. में सौभाग्यशाली हूँ कि मेरे बेटे ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया.

आपको बता दें कि  कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से लोहा लेते हुए 6 जुलाई को शहीद हुए मध्य प्रदेश के रंजीत सिंह तोमर (26) की पार्थिव देह उनके गृहगांव रेव में पहुंचा. सेना के जवान उनका शव लेकर सुबह 6 बजे ही गांव में पहुंच गए. रात भर से इंतजार कर रही मां को शहीद बेटे की पार्थिव देह आने की खबर पाकर वह दौड़ती हुई घर से बाहर निकलीं और ताबूत से लिपट गईं. बेटे की पार्थिव देह लेकर आए सैनिक से लिपटकर मां बोली कि मेरा बेटा रंजीत शहीद हो गया तो क्या हुआ… तुम भी तो मेरे सपूत ही हो, भारतीय सेना का हर जवान मेरा सपूत है. सेना के जवानों ने उन्हें संभालते हुए ढांढस बंधाया. सैनिक ने भी शहीद की मां से कहा कि बिल्कुल मैं भी आपका ही सपूत हूं. गांव में शहीद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. रंजीत को छोटे भाई रामबाबू ने मुखाग्नि दी. शहीद को अंतिम विदाई देने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा समेत कई जनप्रतिनिधियों ने शहीद की अंतिम यात्रा में कंधा दिया.

अंतिम संस्कार के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा भी श्रृद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रंजीत के पिता प्रताप सिंह, मां द्रोपदी, भाई हीरासिंह, रामबाबू और बहन नैना के सिर पर हाथ रखा ढांढस बंधाया. उन्होंने कहा कि रंजीत ने देश के लिए बलिदान दिया है. पूरा प्रदेश आपके साथ खड़ा है. सीएम ने सैनिक रंजीत के पिता प्रताप सिंह से कहा कि मैं भी आपका बेटा हूं, हमेशा आपके साथ खड़ा रहूंगा. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शहीद के परिजन को 1 करोड़ रुपए की सम्मान निधि, दतिया शहर में एक फ्लैट, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, शहीद के नाम पर किसी एक सरकारी संस्था का नामकरण और गांव में शहीद के नाम पर पार्क और प्रतिमा की स्थापना करने की घोषणा की.

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