7 साल की बच्ची का शरीर नोंचकर गुप्तांग में डाल दी रॉड और काट दिया गला.. खामोश है बॉलीवुड इरफ़ान का नाम सुनकर

आखिर ये कौन सी सोच है जो महिलाओं को सिर्फ भोग की वस्तु समझती है अपनी हवस में उनके जीवन को रौंद देती है? ये सोच कभी अपनी बेटी की उम्र की महिलाओं की इज्जत की प्यासी बन जाती है तो कभी मासूमों के जीवन को रौंद देती है. लेकिन यहां एक और सवाल खड़ा होता है कि क्या ऐसे लोग इंसान कहलाने लायक हैं जो एक 7 साल की बच्ची के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम देते हैं, उसका अंग बिच्छेद कर देती है? ऐसी ही व्यभिचारी सोच का शिकार मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की एक ७ वर्षीय मासूम बच्ची हुई है जिसके साथ इरफ़ान नामक दरिंदे ने बेरहमी के साथ बलत्कार किया व ह्त्या के इरादे गला रेतकर झाड़ियों में फेंक दिया. लेकिन इससे भी बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि इस ह्रदयविदारक व शर्मशार करने वाली घटना पर वो तमाम मज़हबी कट्टरपंथी, बॉलीवुड व मानवता के ठेकेदार हो गए हैं खामोश और निरुत्तर जिन्होंने कठुआ बलात्कार केस को दिया था मजहबी रंग व किया था मिडनाइट केंडलमार्च.

खबर के मुताबिक़, तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली 7 साल की मासूम बच्ची मंगलवार को स्कूल से गायब हो गई थी जिसके बाद मासूम के परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसके बाद बुधवार को मंदसौर बस स्टैंड के पीछे उससे लगभग 700 मीटर दूरी पर लक्षमण दरवाजे के पास, कांटों से भरी झाड़ियों में बच्ची गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली. बच्ची के शरीर पर जगह जगह काफी चोटें थी, उसके गर्दन में लंबा घाव था जिसकी वजह से फिलहाल वो कुछ भी बोल नहीं पा रही थी. मंदसौर एसपी मनोज सिन्हा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उसके साथ रेप किया गया था. उन्होंने बताया कि मामले की खबर मिलते ही वह बच्ची को पास के अस्पताल लेकर गए जिसके बाद उसे इलाज के लिए इंदौर रेफर कर दिया गया. पुलिस के मुताबिक जब वह बच्ची के पास पहुंचे तो उसकी हालत ठीक नहीं थी. उसके शरीर से बहुत ज्याजा खून बह रहा था.जब उसे पास के अस्पताल ले जाया गया तो वहां से डॉक्टरों ने उसे इंदौर के लिए रेफर कर दिया. इस वक्त उसकी हालत काफी गंभीर बनी हुई है. उन्होंने बताया कि आरोपी ने बच्ची को अप्राकृतिक तौर पर प्रताड़ित किया है.

बताया गया है कि दरिंदे इरफ़ान ने न सिर्फ मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया बल्कि हैवानियत की साड़ी हदें पार करते हुए मासूम के प्राइवेट पार्टी में रॉड जैसी किसी वस्तु को डाल दिया जिससे बच्ची की अतने तक बाहर आ गयीं. यही नहीं बल्कि इसके अलावा उसने बच्ची की जान से मारने के इरादे से धारधार हथियार से गला रेट दिया तथा मृत समझकर झाड़ियों में फेक दिया. लेकिन जब बच्ची को बरामद किया गया तो ईश्वर की कृपा से बच्ची की सांसे चल रही थीं जिसके बाद इंदौर के एमवायएच अस्पतला के डॉक्टरों ने ३ घटने के लंबे और जटिल ऑपरेशन के बाद बच्ची की जान बचाई है. डॉक्टरों ने बताया है कि सर्जरी के बाद बच्ची की हालात गंभीर है तथा पूरी तरह से सही होने में काफी समय लगेगा लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर बच्ची की सेहत पर लगातार नजर रख रहे हैं तथा बच्ची की हालत स्थिर बनी हुई है.

इस शर्मनाक व दर्दनाक वारदात के बाद कल पूरा मंदसौर शहर सड़कों पर उतर आया तथा दुराचरी इरफ़ान को फांसी देने की मांग की. लेकिन इस घटना पर चुप क्यों हैं स्वरा भास्कर, करीना कपूर, सोनम कपूर, हुमा कुरैशी, जावेद अख्तर जो कठुआ मामले पर प्लेकार्ड लेकर शर्मिन्दा हो रहे थे? क्यों चुप हैं वो राजनेता जिन्होंने कठुआ मामले पर मिडनाइट केंडल मार्च किया था? क्यों चुप हैं वो मानवतावादी तथा नारी सशक्तिकरण वाले तथाकथित संगठन जो जिन्होंने मामले पर देश को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी. निश्चित रूप से कठुआ मामला बहुत ही भयावह तथा शर्मनाक था जिसका विरोध किया जाना जरूरी था लेकिन आखिर वही विरोध मंदसौर की दिव्या के लिए क्यों नहीं? आखिर ये लोग बलात्कार जैसे शर्मनाक मामलों में भी सेलेक्टिव कैसे हो जाते हैं? अगर मंदसौर घटना का आरोपी टोपी वाला इरफ़ान न होकर किसी अन्य समाज से होता तो क्या तब भी इसी तरह की छुपी रहती? आखिर वो कौन लोग हैं जो बलात्कार में भी धर्म-मजहब के आधार पर फैसला करते हैं कि विरोध करें या नहीं? अगर बलात्कारी कोई हिन्दू या गैर मुस्लिम होता है तो इन तथाकथित बॉलीवुड के कलाकारों, मानवता वादियों की आत्मा जाग जाती है लेकिन अगर बलात्कारी सम्प्रदाय विशेष का होता है तो इन लोगों की जुबान नहीं खुलती है. बेटी दिव्या! तुम्हारे लिए कोई लड़ाई लाडे या न लड़े लेकिन सुदर्शन चैनल तुम्हारे लिए आवाज उठाएगा, तुम्हें न्याय दिलाने के लड़ेगा. 

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