कश्मीरी पत्थरबाजो से कहीं आगे निकल गया मध्य प्रदेश मुरैना का DM. खाना खा रहे सेना के जवान पर बरसाए थप्पड़

ये भारत का प्रशासन है जिसे आप आगे पढने जा रहे हैं . ये वो प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारी हैं जो पत्थरबाजो के मुदकमे वापस लेती हैं , वो पत्थरबाज जो भारत की अस्मिता पर पत्थर मारते हैं. लेकिन जो जवान भारत की रक्षा अपनी भुजाओं के दम पर करते हैं उन जवानों को न सिर्फ सीमाओं पर अपने प्राण देने पड़ रहे हैं अपितु देश के अन्दर भी उनको बुरी तरह से मारा जा रहा है और वो भी उन अधिकारीयों द्वारा जो प्रशासन के सर्वोच्च पदों पर बैठे हैं ..

विदित हो कि जिन भुजाओं के दम पर चीन जैसा देश भी वापस लौट गया उनके गालों पर एक बेहद संवेदनहीन जिलाधिकारी ने बरसाए हैं थप्पड़ . ये DM कहीं और नही बल्कि शिवराज के राज मध्य प्रदेश के मुरैना के हैं जो शुक्रवार को मुरैना शहर की सड़क पर अतिक्रमण को हटाने गए थे . इनका नाम है कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार जो सडक पर भारी पुलिस बल ले कर अतिक्रमण हटा रहे थे . इतने में उन्ही में एक जगह सेना का एक जवान खाना खा रहा था .. भारत की संस्कृति है कि कम से कम खाना खाते समय किसी आतंकी तक को नहीं तंग किया जाता है लेकिन कलेक्टर साहब ने अपने कुछ चाटुकार अधिकारियो की पूरी टोली ले कर उस जवान पर जांबाजी दिखाते हुए हमला बोल दिया .

इन जिलाधाधिकारी महोदय ने शायद हो अपने क्षेत्र में मौजूद दस्यु समूहों , बंगलादेशियो अदि पर ऐसी दादागीरी न दिखाई हो लेकिन सेना के जवान द्वारा खाना खाने तक की अनुमति मांगना उन्हें इतना ज्यादा खल गया कि उन्होंने उस पर थप्पड़ों की बौछार कर दी .. उनको देख कर उनके चाटुकार अधीनस्थों ने भी उनका अनुसरण किया और अकेले जवान को बुरी तरह से गाली गलौज देते हुए पिटाई की . हद तो तब हो गयी जब उस जवान पर अतिक्रमण हटाने में बाधा अदि डालने का दोषी बता दिया गया जबकि उसका कोई वहां खुद का खड़ा किया गया अतिक्रमण भी नहीं था जो वो ऐसा कार्य करता .

यह घटना मुरैना शहर के एम एस रोड पर स्थित दुकान की है . हैरानी की बात ये रही कि जवान के साथ आतंकियों जैसा व्यवहार करने में सिर्फ जिलाधिकारी महोदय ही नहीं वहां के वर्दी पहनने वाले पुलिस अधीक्षक आदित्यप्रताप सिंह भी थे जो शेर की तरह आतंकियों से ज्यादा सेना के उस जवान पर टूट पड़े थे .  सेना के उस जवान द्वारा कोई शिकायत भले ही दर्ज न करवाई गयी हो लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद ये घटना जनता के लिए आक्रोश का कारण बन गयी और हर तरफ से केवल एक मांग होने लगी कि जिस जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के अन्दर भारत की सेना के सैनिको के प्रति इतनी नफरत भारी है वो किस प्रकार से जनसामान्य के लिए न्यायप्रिय शासक हो सकता है . ये वो प्रदेश है जहाँ का पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आतंकी ओसामा के नाम के बाद भी “जी” शब्द लगाता है लेकिन उसी प्रदेश का एक जिलाधीकारी अपने पद और रुतबे को सेना के जवान पर जनता में दहशत फैलाने के लिए प्रयोग कर रहा था . फिलहाल हर तरफ से एक ही मांग है कि तत्काल ऐसी संवेदनहीनता पर कार्यवाही हो . 

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