भोपाल में एक नामी मुस्लिम परिवार आया है चर्चा में. यहां भी मामला तलाक और हलाला से जुड़ा हुआ….

हमारे देश को आजाद हुए लगभग 70 साल हो चुके है। लेकिन गुलामी की जंजीरे आज भी किसी को जकड रखी है, वो है महिलाएं जिन्हें आज भी उनकी आजादी से वंचित किया जा रहा है। महिलाओं पर अत्याचार, उनकी आजादी को छींनना ये हमारे समाज में काफी समय से चलता आ रहा है। एक जानवर तो अपनी मर्जी से जी सकता है, आजाद घूम सकता है, लेकिन महिलाओं को आज भी कैदी की तरह रखा जाता है। ऐसा क्यों …?

क्या महिलाएं एक वस्तु है जिसे अपने अनुसार इस्तेमाल करके कहीं भी फेंक दिया जाये…? उदहारण के तौर पर ये घटना एक भोपाल के मुस्लिम परिवार की है जहां पहले तलाक दिया और अब हलाला के लिए महिला पर दबाव के साथ साथ पैसे का लालच दिया जा रहा है। भोपाल में एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला ने अपने ससुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि उसके ससुर निकाह हलाला के लिए उसके ऊपर दबाव डाल रहे हैं। आरोप लगाने वाली महिला कोई और नहीं बल्कि भोपाल के मुख्य मुफ्ती यानी मुफ्ती-ए-शहर अब्दुल कलाम की बहू शाइस्ता अली है।
सुत्रों के मुताबिक, शाइस्ता अली ने बताया कि भोपाल के मुख्य मुफ्ती और उसके ससुर अब्दुल कलाम उसके ऊपर निकाह हलाला करने का दबाव डाल रहे हैं। शाइस्ता का कहना है कि उसके ससुर ने कहा है कि अदालत में चल रहे केस को रफा दफा करने के लिए उसके ससुराल वालों ने पैसे की भी पेशकश की है। शाइस्ता के मुताबिक उसके ससुर ने कहा है कि वो पहले उसका निकाह अपने एक रिश्तेदार से करवा देंगे फिर कुछ वक्त के बाद वो उसे तलाक दे देगा, फिर शाइस्ता मुफ्ती अब्दुल कलाम के बेटे मुहम्मद सालेह के साथ रह सकती है।
शाइस्ता की शादी 5 अगस्त 2010 को भोपाल के मुफ्ती ए शहर के बड़े बेटे मुहम्मद सालेह के साथ हुई थी। लेकिन कुछ ही महीनों के साथ शाइस्ता के ससुराल वालों ने दहेज की मांग शुरू कर दी और शाइस्ता से अपने घर से 2 लाख रुपये लाने को कहा। तीन साल बाद में बात तलाक तक पहुंच गई। जिसके बाद शाइस्ता कोर्ट गई और सालेह के खिलाफ घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ता का मुकदमा किया। अदालत ने सालेह को हर महीने 5 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। लेकिन घरेलू हिंसा का मामला अब भी चल रहा है। 
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