आदिवासियों का धर्मान्तरण कराने अंडमान आया था अमेरिकी ईसाई धर्मान्तरणकारी जॉन एलन चाऊ.. आदिवासियों ने मार डाला

ईसाई धर्मान्तरणकारी जॉन एलन चाऊ अमेरिका से चलकर हिंदुस्तान के अंडमान दीप आया था ताकि वह आदिवासी जनजाति के लोगों का धर्मान्तरणकरा सके, उन्हें ईसाई बना सके. लेकिन इससे पहले वह अपने मंसूबों को अंजाम तक पहुंचा पाता, उससे पहले ही आक्रोशित आदिवासियों ने जॉन एलन चाऊ पर तीरों से हमला कर दिया, जिससे उसकी  हो गई. चाऊ का शव ढूंढने के लिए स्थानीय प्रशासन ने हेलिकॉप्टर भेजा था, लेकिन आदिवासियों के हमले के कारण वह द्वीप में उतर नहीं सका.

स्थानीय मीडिया के अनुसार, मृतक चाऊ एक मिशनरी थे जो ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए सेंटिनलीज़ आदिवासी लोगों से मिलना चाहते थे. एक अखबार ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि चाऊ पहले भी पांच बार अंडमान-निकोबार द्वीपों का दौरा कर चुके थे. बता दें कि उत्तरी सेंटिनल द्वीप सेंटिनेलिस का गढ़ है, जो एक स्वदेशी जनजाति है. वो किसी भी बाहरी इंसान से संपर्क नहीं रखना चाहते. वो उनके क्षेत्र में किसी की आमद को स्वीकार नहीं करते हैं. भारतीय कानून सेंटिनली लोगों की रक्षा करता है.

पुलिस के मुताबिक, सात मछुआरे चाऊ को उत्तरी सेंटीनेल द्वीप ले गए थे, जहां सेंटीनेल जनजाति के लोग (सेंटीनलीज) रहते हैं. इस जनजाति और उनके इलाके को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है. अमेरिकी नागरिक ने इस जनजाति के लोगों से मिलने की इच्छा जताते हुए मछुआरों को वहां तक ले जाने के लिए राजी किया था. सातों मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया गया है. मछुआरों ने पुलिस को बताया कि वे 14 नवंबर को सेंटीनेल द्वीप पर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सफल नहीं हुए. दो दिन बाद 16 नवंबर को वे पूरी तैयारी के साथ द्वीप पर पहुंचे. उन्होंने अपनी नाव को रास्ते में ही छोड़ दिया और टेंट लगाने का सामान लेकर द्वीप में घुस गए. मछुआरों के मुताबिक, चाऊ ने जैसे ही द्वीप में कदम रखा, उन पर धनुष-बाण से हमला कर दिया गया. हमला होने के बाद भी चाऊ आराम से टहलते रहे.

चाऊ की हत्या करने के बाद आदिवासी उनके शव को रस्सी से घसीटते हुए समुद्र तट तक ले गए और शव को रेत में दबा दिया. मछुआरों ने बताया कि यह देखकर वे डर गए और भाग हुए. अगले दिन सुबह मछुआरे दोबारा सेंटीनेल द्वीप पहुंचे तो चाऊ का शव समुद्र किनारे पड़ा दिखा था, लेकिन वे उसे ला नहीं सके. ऐसे में मछुआरे पोर्ट ब्लेयर पहुंचे और मामले की जानकारी चाऊ के दोस्त और स्थानीय ईसाई प्रचारक एलेक्स को दी. एलेक्स ने बताया कि पिछले कई साल में चाऊ कई बार अंडमान आ चुके थे जो सेंटीनलीज से बातचीत करके उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहते थे. लोगों ने बताया कि उच्चस्तरीय पहुंच और अनुमति के बाद ही कोई भी व्यक्ति अंडमान निकोबार के प्रतिबंधित क्षेत्र में जा सकता है.

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