दशकों बाद त्रिपुरा में गूंजा “राष्ट्रगान” जहाँ का हीरो हुआ करता था कभी हत्यारा लेनिन

आखिर वो कौन लोग हैं हो “राष्ट्रगान” भी नहीं गाते और नहीं गाते तो क्यों नहीं गाते ? त्रिपुरा में श्री विल्पब देव के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक ऐसा खुलासा हुआ जिसे सुन देश आश्चर्यचकित रह जायेगा. जी हाँ त्रिपुरा की विधानसभा में आज तक कभी राष्ट्रगान नहीं गाया गया. वही त्रिपुरा जहाँ लाल सलाम का नारा बुलंद करने वाले वामपंथियों की पिछले 25 साल से  थी लेकिन चाहे वामपंथी सरकार रही हो या कोई भी सरकार त्रिपुरा की विधानसभा में कभी राष्ट्रगान नहीं गाने दिया गया. ये वही लोग हैं स्वयं को राष्ट्र का वास्तविक कर्ताधर्ता बताते हैं लेकिन अपने देश के सम्मान में राष्ट्रगान तक नहीं गा सकते.

खैर समय बदला, त्रिपुरा की जनता ने वामपंथ के शासन से त्रस्त होकर भाजपा को दो तिहाई बहुमत से राज्य की सत्ता सौंपी. जिस उम्मीद तथा आशाओं के साथ त्रिपुरा की जनता ने भाजपा को जिताया था, भाजपा की सरकार बनने के बाद वो उम्मीदें पूरी होती नजर आ रही हैं. त्रिपुरा में सरकार बदलने के साथ ही अब बदलाव भी नजर आने लगे हैं. विधानसभा में पहली बार शुक्रवार को राष्ट्रगान गाया गया. सदन का पहला सत्र स्पीकर रेबती मोहन दास के चुनाव के साथ शुरू हुआ. जब सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सभी 11 बजे पहुंचे तो राष्ट्रगान चलाया गया. राष्ट्रगान के सम्मान में सभी मंत्री, सदन के सदस्य, आधिकारी, पत्रकार और दर्शक खड़े हो गए. उसके बाद पता चला कि त्रिपुरा की विधानसभा में कभी राष्ट्रगान गाया नहीं गया था.

इतिहास में यह पहली बार था जब त्रिपुरा के सदन में राष्ट्रगान चलाया गया था. सदन के सचिव बामदेब मजूमदार ने कहा कि वह हर दिन राष्ट्रगान चलाने की कोशिश करेंगे. त्रिपुरा में भाजपा की जीत के सूत्रधार रहे सुनील देवधर ने सदन में राष्टगान होने के बाद ट्वीट करके वामपंथी सरकारों करारा हमला किया. सुनील देवधर ने ट्वीट किया “आज 25 वर्ष बाद त्रिपुरा का विधानभवन तब धन्य हुआ जब 12 वी विधानसभा के पहले दिन के आरंभ में सभी विधायकों ने राष्ट्रगीत गाया. जिन देशद्रोहियों ने सत्ता में रहते इसे गाने नहीं दिया था वें कोमरेड भी आज ‘जन गण मन’ गाने पर बाध्य हो गये”. ये बिलकुल सत्य भी है और विप्लब देव की सरकार ने जिस तरह सत्ता में आने के बाद राष्ट्रवाद के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए सदन में राष्ट्रगान गाया वह निश्चित ही सराहनीय कार्य हैं. शायद त्रिपुरा की जनता इन्हीं उम्मीदों के साथ भाजपा को लाई थी तथा विपल्ब देव की सरकार ने अपने विकास के साथ राष्ट्रवादी एजेंडे को लागू करना शुरू कर दिया है.

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