बदलते उत्तर प्रदेश का असर जेलों के अन्दर भी. कभी होती थी सिर्फ रोज़ा इफ्तारी , इस बार हुई नवरात्रि फलाहार पार्टी

उत्तर प्रदेश की आबोहवा किस प्रकार से बदल रही है इसे देखने के लिए सिर्फ वही लोग गवाह नहीं जो खुली हवा में साँस ले रहे जबकि इस बदलाव के गवाह वो भी हैं जो एक चारदीवारी के अन्दर सलाखों में कैद हैं .

कानपुर परिक्षेत्र में कभी बीहड़ों में एक कुख़्यात डकैत हुआ करती थी जिसका नाम था कुसुमा नाइन . कुसुमा नाईन का नाम इस हद तक दहशत से लिया जाता था कि उसके बारे में लोगों का कहना था कि वो लोगों को मार कर उनकी आँखे निकाल लेती थी . कुसुम नाईन को उसके किये की सज़ा भोगने के लिए कानपुर जेल में डाला गया था . वहां उसमे देवी माँ के प्रति श्रद्धा भाव जग और वो डाकू से प्रबल देवी भक्त बन गयी .

वैसे तो कुसुमा नाइन काफी समय से माँ दुर्गा एक व्रत इत्यादि रखती थी पर इस बार उसने जेल के अंदर अपनी बैरक में विधिवत नवरात्रि के फलाहार का कार्यक्रम रखा . जिन जेलों में कभी रोज़ा इफ्तार मनाये जाते थे उन जेलों में अचानक ही नवरात्रि के फलाहार की पार्टी बिलकुल नई बात थी पर जेल शासन और प्रशासन ने इस कदम का खुल कर समर्थन किया और इस फलाहार पार्टी में जेलर के साथ अन्य जेल पुलिस के स्टाफ ने शामिल हो कर माँ दुर्गा के आगे शीश नवाया . 

जेलों के अंदर नवरात्रि के फलाहार कभी तुष्टिकरण से दबे और अब अमूल चूल बदलते उत्तर प्रदेश की एक नयी कहानी लिख रहे हैं जिसमे शासन और प्रशासन सबका बराबर सहयोग मिल रहा है . 

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