सत्ता बदली फिर सोच बदली.. जिसे कहा जाता था आतंकी दल अब वही बटाएंगे राष्ट्र के विकास में हाथ

हिन्दुस्थान में मोदी सरकार का शासन आते ही देश के उन गुनहगारों को सज़ा दी गयी जो 70 सालो से खुलेआम या बेफिक्र जी रहे थे. मोदी शासन में आतंकियों पर शिकंजा कसा गया. कश्मीर में आतंकियों का खात्मा किया गया. और देश्द्रोहिओं को उनके गुनाहों की सज़ा दी गयी. और अब वो उग्रवादी संगठन जो असम में सक्रिय था उसी के उग्रवादी मुख्यधारा में आकर राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देना चाहते है.

अगर सीधे शब्दों में कहे तो देश की सत्ता बदलते ही लोगों की विचारधारा में भी बदलाव आया है. जो उग्रवादी संगठन असम में कई हमले कर चूका है सरकार का विरोध कर चूका है. वही संगठन मोदी शासन में देश के खिलाफ न जाकर देश के समर्थन में काम करना चाहता है. बता दें कि एनडीएपबी के 100 उग्रवादियों सरेंडर करना चाहते हैं. एनडीएफबी(एस) के 100 युवा उग्रवादी जो म्यांमार में हैं, अब मुख्यधारा में लौटने के इच्छुक हैं.
जिससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि आखिरकार पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठन अब देश के हित में कार्य करना चाहते है और उन्हें ये समझ आगया है कि देश के खिलाफ जाकर देश या किसी राज्य में शांति नहीं लायी जा सकती उससे केवल देश को और उसकी एकता को नुक्सान पहुंचेगा। जो किसी भी राष्ट्र के लिए नुकसानदायक है.
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