जान पर खेलकर लड़ी थी मेरठ पुलिस अपराधी इरशाद से .. अब अचानक ही आ गया बीच में मानवाधिकार आयोग

हम सबको चुस्त दुरुस्त कानून व्यवस्था चाहिए , हर किसी को अपराध और भय से मुक्त समाज चाहिए लेकिन जब पुलिस अपराधियों के खिलाफ कार्यवाई करे, अपनी जान पर खेलकर अपराधियों का खात्मा करे तब कहा जाता है कि पुलिस हत्यारी है तथा तथाकथित मानवाधिकारी पुलिस के खिलाफ खड़े हो जाते हैं लेकिन जब अपराध का ग्राफ बढ़ता है तो कहा जाता है कि पुलिस निकम्मी है.   आखिर पुलिस से दोतरफा सवाल क्यों किये जाते हैं? आखिर क्यों पुलिस को ही बार बार निशाना बनाया जाता है? हम अपराध से मुक्ति तो चाहते है लेकिन ये नहीं बताते कि अपराध से मुक्ति मिलेगी कैसे?

एक बार पुनः मानवाधिकार तनकर खड़ा हो गया है उस मेरठ पुलिस के खिलाफ जिसने मुजफ्फरनगर निवासी गोतस्कर इरशाद तथा उसके साथी अपराधियों का अपनी जान पर खेलकर मुकाबला किया था. इस दौरान अपराधी इरशाद की गोली से सब इंस्पेक्टर ओमप्रकाश घायल हो गये थे तथा अपराधी इरशाद मारा गया था. मेरठ पुलिस से मुठभेड़ में इरशाद की मौत के बाद मानवाधिकार पुलिस के खिलाफ खडा हो गया है तथा इस बारे में पुलिस से जवाब मांगा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश गृहसचिव तथा उत्तर प्रदेश पुलिस डीजीपी ओपी सिंह को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के अंदर इस बारे में रिपोर्ट माँगी है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कहना है कि मीडिया रिपोर्टों के अधारा पर हमें पता चला है कि इरशाद का फर्जी एनकाउंटर किया गया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कहना है कि “किसी मुठभेड़ में हुई मौत अगर न्यायसंगत नहीं है तो इसे गैर इरादतन हत्या का एक अपराध माना जाएगा.” वहीं एनकाउंटर को लेकर पुलिस का कहना है कि इरशाद अपने चार साथियों के साथ पशुओं को मिनी ट्रक में ले जा रहा था. जब उन्हें रोकने की कोशिश की गई तो उनलोगों ने फायरिंग शुरू कर दी.जवाबी कार्रवाई में पुलिस की तरफ से भी फायरिंग की गई, जिसमें उसकी मौत हो गई.

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