हिन्दू धर्माचार्य भले हैं खामोश लेकिन इस चर्च ने कहा – “त्रिशूल त्यागो, क्रॉस चुनो”


संवैधानिक रूप से हिन्दुस्तान एक धर्म निरपेक्ष देश है जहाँ कई धर्मों को मानने वाले लोग है तथा किसी को भी किसी दुसरे धर्म, समुदाय या मजहब के खिलाफ गलत टिप्पणी करने की मनाही हैं. लेकिन उसके बाद भी वो कौन लोग हैं जो खुलेआम दुसरे धर्म पर गलत टिप्पणी करते हैं? वो कौन लोग हैं जो निहित स्वार्थ तथा राजनीति के लिए सर्व धर्म समभाव की जगह की जगह दुसरे के प्रति जहर खोलते हैं और क्या इसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होनी चाहिए??

कुछ दिनों पहले नागालैंड में चुनाव प्रचार के दौरान एक चर्च से आदेश जारी किया गया कि त्रिशूल तथा क्रॉस में से किसी एक को चुनों. जब नागालैंड में चुनाव प्रचार चल रहा था, राजनैतिक पार्टियों में एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी था उसी समय नागालैंड की सबसे बड़ी चर्च संस्था “नागालैंड बैपटिस्ट चर्च परिषद”(NBCC) ने एक पात्र के माध्यम से लोगों से ईएसआई अपील की जिसकी कोई उमीद नहीं कर सकता है. चर्च ने  कि वो ‘त्रिशूल’ और ‘क्रॉस’ में से किसी एक को चुनें. चिट्ठी में लिखा गया कि नागालैंड के लोग विकास व पैसे को न चुनें व त्रिशूल(बीजेपी) को न चुनें बल्कि क्रॉस को चुनें ईसाईयत को चुने.

अगर यही टिप्पणी कोई हिन्दू धर्माचार्य कर देता तो बबाल मच जाता. धर्मनिरपेक्षता के तमाम ठेकेदार चीखने लगते लेकिन एक चर्च का आदेश क्या धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ नहीं है? क्या एक धार्मिक संगठन इस तरह दुसरे धर्म का अपमान करते हुए टिप्पणी करता है टी क्या ये माफी योग्य है? निसंदेह नहीं.  आप अपनी आस्थाओं को मान सकते हैं प्रचार के सकते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से इस तरह किसी दुसरे धर्म के खिलाफ नहीं बोल सकते हैं. त्रिशूल जो हिन्दू धर्म में सबसे पूज्य माना है जो भगवान शिव का अस्त्र है तो आप अपने धर्म के समर्थन के लिए दुसरे धर्म के खिलाफ दुसरे धर्म के प्रतीक के खिलाफ त्रिशूल के बहाने हिन्दू धर्म के खिलाफ नहीं बोल सकते हैं.

 NBCC के आदेश के बाद हिन्दू समाज में आक्रोश का माहौल है. कई हिन्दू संगठनों का कहना है कि चर्च के  इस तरह के आदेश के बाद हिन्दू धर्माचार्यों को भी आगे आना चाहिए तथा हिन्दुत्व के लिए आवाज उठानी चाहिए. NBCC के इस आदेश का नागालैंड की जनता पर क्या फर्क पड़ा है ये आज शाम तक चुनाव परिणामों की घोषणा से पता चल जायेगा. लेकिन निश्चित ही हिन्दू धर्माचार्य भी इस पर विचार करें कि क्या अब वो समय आ गया है जब धर्म हित में उनको भी आगे बढकर मोर्चा संभालना चाहिए? 


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