अटल जी की अस्थियों के विसर्जन का विरोध किया इस प्रदेश के चर्च ने… देशभर में आक्रोश

भारतरत्न पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन के बाद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से देशभर में अटल जी की अस्थि कलश यात्रा निकाली जा रही है तथा देशभर की कई नदियों में अटल जी की अस्थियों को प्रवाहित किया जा रहा है. अटल जी के अंतिम संस्कार के बाद सबसे पहले देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में माँ गंगा नदी में अटल जी की अस्थियाँ प्रवाहित की गयी, इसके बाद देश के हर राज्य की नदी में भाजपा की तरफ से अटल जी की अस्थियों को प्रवाहित करने की निर्णय लिया गया. लेकिन इसी बीच एक प्रदेश का चर्च वहां की नदी में अटल जी की अस्थियों को प्रवाहित करने के खिलाफ खड़ा हो गया तथा नदी में अस्थियों को प्रवाहित नहीं होने दिया.

मामला पूर्वोत्तर के राज्य नागालैंड का है. भाजपा ने नागालैंड के वोखा जिले की दोयांग नदी में भी अस्थि प्रवाहित करने की योजना बनाई गई थी. लेकिन नागालैंड बैप्टिस्ट चर्च काउंसिल (एनबीसीसी) ने दोयांग नदी में अस्थियों को प्रवाहित नहीं होने दिया, इसके बाद अस्थियों को दीमापुर के धनसिरी नदी में प्रवाहित किया गया. इसके पीछे चर्च ने बहाना दिया कि ऐसा करने से जन भावनाएं आहत होंगी. भाजपा ने मामले को तूल न देते हुए दुसरी नदी में अस्थियों को प्रवाहित किया लेकिन यहां सवाल खडा होता है कि अविरल बहती नदी के जल में अस्थि प्रवाह करने से किसी व्यक्ति विशेष की भावनाएं कैसे आहत होती हैं? न तो किसी को जबरदस्ती उस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया, न इस कार्यक्रम में किसी स्थानीय परंपरा, रीति का अपमान किया गया. इस कार्यक्रम में न ही किसी धार्मिक स्थल का प्रयोग हुआ, तब आखिर चर्च की जनभावनाएं कैसे आहत हुईं ?

जिस तरह से नागालैंड बैप्टिस्ट चर्च काउंसिल (एनबीसीसी ने अटल जी की अस्थि विसर्जन का विरोध किया वो कुछ अलग ही  संकेत देता है. एनबीसीसी वही संगठन है जिसने इस वर्ष के आरंभ में हुए विधानसभा चुनावों में अपना विशेष घोषणा पत्र जारी किया था. घोषणा पत्र में मतदाताओं से आग्रह किया गया था कि ‘मैं ईसाई पहले हूं, बाद में एक मतदाता’. नागालैंड बैप्टिस्ट चर्च काउंसिल ने ईसाई धर्म में विश्वास रखने वालों से आग्रह किया था कि पैसे और विकास के खातिर ईसाई सिद्धांतों का आत्म-समर्पण उन लोगों के आगे न करें जो “यीशु मसीह के हृदय को भेदना चाहते हैं”. एनबीसीसी ने ईसाई धर्म में विश्वास रखने वालों से त्रिशूल और क्रॉस के बीच में किसी एक में चुनाव करने का आह्वान तक कर दिया था.

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