पलायन के बाद अब मेरठ के लिसाड़ी गेट में पुलिस पर हमला.. सिपाही को घेर लिया गया था शाहिद ने प्रयागराज के दरोगा शैलेन्द्र सिंह की तरह

उस सिपाही के हालत ठीक उस सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की तरह बन चुके थे जो 4 वर्ष पहले प्रयागराज की कचेहरी में अकेला ही कई लोगों से घिर कर खुद से दूर जाने की चेतावनी दे रहा था. बाद में जो कुछ भी हुआ उसको आज रायबरेली की जेल में जा कर देखा जा सकता है जहाँ पर शैलेन्द्र सिंह अपनी ही रक्षा करने के अपराध में जेल काट रहा है . उसका साथ सभी छोड़ चुके हैं , यहाँ तक कि उसके वो अधिकारी भी जिनकी नजर में वो एक होनहार पुलिस सब इंस्पेक्टर हुआ करता था .

मेरठ में अगर किसी क्षेत्र ने पुलिस की सबसे ज्यदा किरकिरी करवाई है या पुलिस के ऊपर से सबसे ज्यादा विश्वास कम अगर कहीं या किसी क्षेत्र से हुआ है तो वो है लिसाडी गेट.. यहाँ पर समाज का पुलिस से विश्वास तो दूर खुद पुलिस वालों का आत्मविश्वास डगमगा जाता है क्योकि उसके हाथ बंधे हैं और उसी से सब आशा है .. इस से पहले भी उसी क्षेत्र में पुलिसकर्मियों पर हमले हो चुके हैं और वहां उसी क्षेत्र में कई घरों में मकान बिकाऊ है के बोर्ड भी लग चुके हैं …

अब एक नया मामला आया है सामने जहा पर मेरठ में व्यापारी नेता के नाम से विख्यात शाहिद नाम के व्यक्ति ने कैमरे के आगे पुलिस के ऊपर हमला बोल दिया .. पुलिस वाले पूरी तरह से कानून और नियम का पालन करते हुए उस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने गये थे जहाँ पर शाहिद जैसों की दादगीरी के चलते आम जनमानस का जाना मुश्किल हुआ करता था और कभी अच्छा खासा रास्ता होने वाला क्षेत्र अब मात्र एक मकडजाल के रूप में दिखाई देता है ..

पुलिस वाले अपना काम पूरी तरह से नियमानुसार कर रहे थे कि अचानक पूरी तैयारी के साथ शाहिद अपने साथियों के साथ आया और पुलिसकर्मियों से उलझ गया.. पुलिस ने उसको बाकायदा समझाने की कोशिश की लेकिन उसको जैसे उलझने की धुन सवार थी .. अचानक ही एक सिपाही ने उस से पुलिस के काम में बाधा न डालने की बात कही जिसके बाद वो और उसके पहले से तैयार साथी उस पुलिसकर्मी पर हमलावर हो गये. पुलिस बल होने के बाद भी सिपाही अकेला पड़ गया और उधर से कई लोग एकजुट  …

ये सभी मिल कर पुलिस के सिपाही को खींच कर दूकान के अन्दर तक ले गये और उसको भद्दी भद्दी गालियाँ देते हुए उसके साथ मारपीट की ..अपनी गलती को ढकने और Offence is Best Defense की नीति अपना कर ये सभी पुलिस कर्मी को ही पिस्टल निकालने का आरोपी बताने लगे लेकिन सच्चाई वीडियो में साफ़ दिख गई कि मोब लिंचिंग के अंदाज़ में कौन आया था..  तैसे बीच बचाव के बाद ये मामला काबू आया लेकिन शाहिद अपने उस कार्य में सफल हो गया जिसमे उसको पुलिस के अतिक्रमण विरोधी काम में व्यवधान डालना था ..

निश्चित रूप से अगर पुलिस के गिरे मनोबल की बात की जायेगी तो मेरठ का लिसाडीगेट शायद प्रदेश के सबसे ऊपर थानाक्षेत्रों में गिना जाएगा .. इस मामले में पुलिस के अनुसार सिपाही की जांच करवाई जा रही है लेकिन जिन्होंने पुलिस के खिलाफ इतना बड़ा दुस्साहस किया उनके खिलाफ क्या हो रहा है ये अभी तक पता नहीं चला है.. इस मामले में ये भी देखने योग्य होगा कि मेरठ के पुलिस प्रमुख अपना जोर किस पर दिखाते हैं , जगह को कब्जा कर के दादागीरी करते कब्जेदारों पर या अंत में अपने ही विभाग के सबसे निचले पायदान पर खड़े एक सिपाही पर जो हिम्मत कर पाया था अवैध कब्जेदारों के खिलाफ सीना तान कर खड़े होने की .

देखिये दुस्साहस का पूरा वीडियो

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