सड़क सिर्फ सड़क ही रहेगी, इबादत की जगह नहीं.. जो नियम तोड़ेगा उसको झेलनी ही होगी कार्यवाही

उत्तर प्रदेश में अब सड़क इबादत की जगह नहीं बल्कि सिर्फ सड़क ही रहेगी. अब उत्तर प्रदेश में कहीं पर भी सड़क पर नमाज नहीं पढी जा सकेगी, जिससे जाम की समस्या से निजात मिलेगी. पहली बार में तो ये बात सुनने में काफी अटपटी लगती है कि उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई भी जा सकती है, लेकिन ये सच है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से ये फैसला ले लिया गया है कि अब सड़क पर नमाज नहीं होने दी जायेगी तथा जो भी इस आदेश का उल्लंघन करेगा, उस पर कार्यवाई की जायेगी. यूपी में सड़क पर सिर्फ नमाज ही नहीं बल्कि आरती व अन्य मजहबी कार्यक्रम भी नहीं किये जा सकेंगे.

खबर के मुताबिक़, उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने प्रदेश में सड़कों पर आरती करने या नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने यह आदेश दिया है. ओपी सिंह के अनुसार सार्वजनिक जगहों पर ऐसा कुछ नहीं करने की अनुमति दी जा सकती है जिससे यातायात और सामान्य जीवन बाधित हो. डीजीपी सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुये कहा कि धार्मिक स्थानों पर जब भी नमाज या आरती की व्यवस्था हो तो उसमें कोई भी व्यक्ति सड़कों पर नहीं आना चाहिये ताकि यातायात बाधित न हो.

उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने कहा कि वह चाहते हैं कि सौहार्दपूर्ण तरीके से सड़क पर होने वाली नमाज और आरती दोनों को रोका जाए, ताकि आम लोगों को कोई असुविधा न हो. उन्होंने कहा कि सड़क पर नमाज नहीं होगी, इसकी शुरुआत हमने मेरठ से की और बाद में इसका प्रयोग अलीगढ़ में भी किया गया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब लोगों को जोड़कर कोई फैसला लिया जाता है तो उसका असर होता है. अलीगढ़ तथा मेरठ में यही हुआ है तथा अब पूरे सूबे में यही होगा.

डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि नमाज पर कोई रोक नहीं होगी. मस्जिदों के बाहर सड़क पर जो लोग आ जाते हैं, हम चाहेंगे कि सकारात्मक तरीके से इस पर पहल हो और सड़क पर नमाज न हो. इस फैसले को लेकर जनता में नाराजगी की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि ईद के दौरान अलीगढ़ और मेरठ में यह प्रयोग बहुत सफल रहा. लोगों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया. उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने कहा कि यह केवल नमाज पर नहीं, बल्कि सभी धार्मिक रिवाजों पर लागू हो. वह चाहे आरती हो या फिर नमाज. गौरतलब है कि कुछ शहरों में सड़कों पर नमाज का विरोध करते हुए कुछ संगठनों ने सड़कों पर आरती का आयोजन करने की शुरुआत कर दी थी. इसके बाद ये फैसला लिया गया है.

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