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क्या और कई DG वंजारा देखेगा ये राष्ट्र ? जावेद अख्तर की याचिका पर रिटायर्ड जज ने गुजरात पुलिस की समीर, ज़ाफ़र व इस्माईल से हुई मुठभेड घोषित किया फर्जी

अभी कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने लगभग यही दर्द और इसी प्रकार के आरोपो का सामना किया था..ये वो जांबाज़ थे जिन्हें पहले अपराधियो के पीछे दिन रात एक कर के पड़ना पड़ा, फिर उनकी सटीक लोकेशन निकालनी पड़ी, तब उन्हें तमाम दबाव व संकटो को पार कर के गिरफ्तार करने का प्रयास करना पड़ा, फिर उनके न मानने पर उनसे अपनी जान की बाजी लगा कर जंग लड़नी पड़ी और जब इस जंग वो पुलिस वाला जिंदा बच गया तो उसको मानवाधिकार के साथ साथ बुद्धिजीवी वर्ग, विपक्षी नेताओं के कई आरोप झेलने पड़े और जब उसको भी वो पार कर गया तो उस पुलिस वाले को सुप्रीम कोर्ट की जांच तक झेलनी पड़ी .

खुद विचार कीजिये कि ऐसे हालात में एक पुलिस वाला क्या करे ? क्या ये हालात उस के मनोबल को तोड़ नही रहे हैं . उत्तर प्रदेश पुलिस के बाद अब नम्बर लग चुका है गुजरात पुलिस का और सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या और तमाम अन्य DG वंजारा देखने को मिलेंगे अभी आने वाले समय मे इस धर्मनिरपेक्ष भारतवर्ष को ?

गुजरात में 2002 से 2006 के बीच हुई 17 में से 3 मुठभेड़ को जस्टिस एचएस बेदी जांच कमेटी ने फर्जी घोषित कर दिया है। शीर्ष अदालत में दाखिल करने के करीब एक साल बाद खोली गई कमेटी की रिपोर्ट में समीर खान, कासम जाफर और हाजी इस्माइल की मुठभेड़ में मौत को प्रथम दृष्टया फर्जी माना है। साथ ही इन मुठभेड़ में शामिल रहे 3 इंस्पेक्टरों समेत 9 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलाए जाने की सिफारिश की है। शीर्ष अदालत की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बेदी की अध्यक्षता वाली मॉनीटरिंग कमेटी को इन 17 मुठभेड़ की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पिछले साल फरवरी में एक सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को सौंपी थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 9 जनवरी को गुजरात सरकार की उस याचिका को ठुकरा दिया था, जिसमें कमेटी की फाइनल रिपोर्ट को गोपनीय बनाए रखने की अपील की गई थी। साथ ही पीठ ने यह रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को सौंपने के आदेश दिए थे, जिनमें गीतकार जावेद अख्तर भी शामिल हैं। कमेटी ने समीर खान के परिजनों को 10 लाख रुपये और कासम जाफर के परिजनों को 14 लाख रुपये का मुआवजा देने के भी सिफारिश की है।

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