बुलंदशहर में फिर हिंसा.. 1 स्कूटी पर 3 सवार शाहिद, राशिद और अजहरुद्दीन के कुचलने के बाद उन्मादियों ने बस फूंकी, यात्रियों व पुलिस पर पथराव. कई घायल

इसमें से अधिकांश लोग वही हैं जो कुछ समय पहले स्याना की घटना के बाद जनता से संयम की अपील कर रहे थे और पुलिस का सम्मान करने की वकालत कर रहे थे ..लेकिन अचानक ही उनकी शांतिप्रियता, उनकी मीठी बातें और उनके वो स्वरचित सिद्धांत न जाने कहाँ खो गए हैं और उनमें से कई लोग दिखने लगे खून के प्यासे.. उन्होंने न कानून की फिक्र की और न ही किसी प्रशासनिक अधिकारी की.. अन्धाधुंध पत्थर बरसने लगे और ये भी नही देखा गया कि उनके द्वारा मारे जा रहे पत्थर पुलिस को लग रहे हैं, किसी वृद्ध को लग रहे हैं या किसी मासूम बच्चे को बींध रहे हैं .. उन्होंने अपना उत्पात जारी रखा और उनकी हरकतों से साफ साफ लग रहा था कि वो खून के प्यासे हो चुके हैं ..

ये मामला है बुलंदशहर जिले का जो अभी एक मामले को ले कर चर्चा में चल रहा है ..लेकिन अब एक नया मामला आ गया है .. दोनों मामलों में एक अंतर है और वो है भीड़ के स्वरूप का .. इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के साथ हुई घटना में खुल कर मीडिया के एक स्वघोषित सेकुलर वर्ग ने चीख चीख कर कहा था कि ये घटना हिन्दू संगठनों ने की थी लेकिन आज उन्ही के मुंह पर अजीब सी ख़ामोशी छा गयी है .. आज राशिद, शाहिद और अजहरुद्दीन की बस से कुचल कर मौत के बाद जिस भीड़ ने बस वाले ड्राइवर, यात्रियों पर और उसके बाद पुलिस पर हमला बोला, उस भीड़ का स्वरूप बताने की हिम्मत चाह कर भी वही सेकुलर समूह नही कर पा रही है , शायद इसके पीछे उनके खुद से गढ़े गए सेकुलरिज़्म के नियम हो .. लेकिन बुलंदशहर के उस क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण पर नियंत्रण में फिलहाल पुलिस की कड़ी मेहनत से चल रहे हैं .

ये घटना है दिल्ली-बदायूं हाईवे की जहां पर ट्यूशन पढ़कर गांव लौट रहे तीन स्कूटी सवार छात्रों को रोडवेज बस ने रौंदा डाला. हादसा सलेमपुर के धतूरी गांव के पास उस वक्त हुआ जब दिल्ली की ओर से आ रही एक रोडवेज़ बस बदायूं की ओर जा रही थी. सामने से एक स्कूटी पर सवार 3 छात्रों को बस ने जोरदार टक्कर मारी जिसके बाद छात्र बस के पहिए के नीचे आ गए. दो छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि तीसरे छात्र की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हुई. इस मामले में प्रथम दोषी तो वो अम्मी अब्बा हैं जिन्होंने एक स्कूटी पर 3 लोगों को भेजा, ये खुद में एक कानूनी अपराध  है.. उनके सरो पर हेलमेट नही थे जो दूसरा कानूनी जुर्म है और उसको चलाने वाले कि उम्र नाबालिग हो सकती है जो अगर सत्य साबित हुआ तो तीसरा कानून का उल्लंघन होगा.. ऐसे में वो तीनों बेहद अजीब ढंग से गाड़ी चला रहे थे और बताया जा रहा कि अपनी ही गलती से  रोडवेज से टकराये क्योंकि रोडवेज का ड्राइवर एक कुशल व अनुभवी ड्राइवर था..

लेकिन बिना पूरा सत्य जाने ही इसहादसे के बाद आसपास के गांवों के लोग मौके पर इकट्ठा हो गए और उन्होंने सड़क पर जाम लगा कर वाहनों को रोकना शुरू कर दिया. इसी दौरान आक्रोशित भीड़ ने रोडवेज बस में तोड़फोड़ शुरू कर दी और थोड़ी ही देर में बस में आग भी लगा दी गई. गनीमत रही कि तोड़फोड़ के दौरान ही बस में बैठे मुसाफिर बस से उतरकर हादसा स्थल से दूर चले गए. भीड़ का गुस्सा यहीं नहीं रुका. आक्रोशित ग्रामीणों ने एक दूसरी बस में भी जमकर तोड़फोड़ की. जानकारी के मुताबिक बस में बैठे कई मुसाफिर भी चोटिल हुए हैं.

आगजनी, पथराव और बसों में हुई तोड़फोड़ की सूचना मिलने पर कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची. एसपी देहात मनीष मिश्र भी पुलिसबल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने वहां उपद्रव मचा रहे लोगों को हल्के बल का उपयोग करके मौके से खदेड़ा. छात्रों के परिजन अपने बच्चों की मौत के लिए रोडवेज बस के ड्राइवर को जिम्मेदार ठहरा रहे थे. उन्होंने उसके खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है. हादसे का शिकार बने तीनों छात्र चिट्ठा मुकीमपुर गांव के निवासी हैं. एक छात्र राशिद 11वीं में पढ़ता है जबकि शाहिद और अजहरुद्दीन दसवीं के छात्र हैं. एसपी देहात मनीष मिश्र ने बताया कि तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. रोडवेज बस चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है. सड़क जाम करके तोड़फोड़, आगजनी और उपद्रव करने वालों के खिलाफ भी केस दर्ज करके उचित कानूनी कार्यवाही की जाएगी. रोडवेज बस ड्राइवर की अभी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. उसकी तलाश जारी है.

 

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