बाइक से खुद गिरे असलम को मानवता दिखा कर कर्तव्यनिष्ठ पुलिस वालों ने ही पहुचाया था अस्पताल. लेकिन उसी पुलिस पर लगा एक स्तब्धकारी आरोप


उत्तर प्रदेश की पुलिस जो अपनी न्यायप्रियता और कर्तव्यनिष्ठ और न्यायप्रिय छवि के लिए वर्तमान समय में प्रसिद्ध है उस पर आधारहीन आरोपों का सिलसिला जारी है . कभी बिजनौर के सिपाही कमल शुक्ला पर आरोप झूठा पाया जाता है , कभी चन्दौसी के चौकी इंचार्ज हरपाल सिंह पर निराधार आरोप लगते हैं . कभी जौनपुर के थानेदार मिथलेश कुमार पर निराधार आरोप लगते हैं तो कभी बरेली पुलिस को निरर्थक कटघरे में खड़ा किया जाता है . लेकिन इसके बीच में अगर कहीं की पुलिस सबसे ज्यादा निशाने पर रही तो वो है अलीगढ़ की पुलिस जिसने किसी भी रूप में किसी भी अपराधी से किसी भी दबाव में झुकना अस्वीकार कर दिया . अलीगढ़ पुलिस की यही निष्पक्ष कार्यशैली कईयों की रास नहीं आई और उन्होंने कभी अनावश्यक नेतागीरी कर के तो कभी फर्जी खबरों या आरोपों से उसको बैकफुट पर डालना चाहा .. लेकिन जनता सब सच्चाई जानती रही और अलीगढ़ पुलिस अपना काम करती रही .

ज्ञात हो कि साधुओ के हत्यारों को सीधे मुठभेड़ में मार गिरा कर समाज को निर्भयता देने वाली अलीगढ़ पुलिस ने के बार फिर से दिखाया है मानवीय स्वरूप और चेकिंग के दौरान पुलिस को देख कर भाग रहे एक व्यक्ति को असंतुलित हो कर गिरने के बाद तमाम काम छोड़ कर उसको अस्पताल ले गई और फ़ौरन ही चिकित्सीय व्यवस्था करवाई .. लेकिन असलम काफी समय से बीमार था और पुलिस और डाक्टरों एक तमाम प्रयासों के बाद भी असलम को बचाया नहीं जा सका . असलम के हालत को उसके घर वालों को पुलिस ने समय से सूचित कर दिया था और आख़िरकार असलम के शव को पोस्टमार्टम आदि कर के उसको सौंप दिया गया . यहाँ तक सब कुछ ठीक चल रहा था और आम जनता अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाने की सहृदयता और मानवीयता को सराह रही थी .. लेकिन अचानक ही इस मामले में सोची समझी साजिश के चलते खड़ा किया जाने लगा विवाद .

कुछ लोगों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि पुलिस ने असलम को थप्पड़ मारा जिसके चलते उसकी जान निकल गयी . थप्पड़ मारने से उस असलम की जान निकलना एक हास्यास्पद आरोप है जो बाइक चला रहा था और रास्ते में कई झटके और गड्ढे आदि पार करता आ रहा था . इतना ही नहीं पुलिस का थप्पड़ मारना तो दूर , किसी के पास को दुर्व्यवहार आदि के को भी प्रमाण नहीं हैं . मौखिक आरोप लगाने वाले भी लगभग वही लोग हैं जो कुछ समय पहले साधुओ के हत्यारों को मार गिराने वाली टीम के खिलाफ हल्ला मचा रहे थे . लेकिन यहाँ प्रशंशा की पात्र है अलीगढ़ पुलिस की कार्यशैली को इतने तमाम आधारहीन आरोपों के बाद भी न्यायपथ पर अटल है और अपराध मुक्त अलीगढ़ के लिए तमाम प्रयास किये जा रही हैं . फिलहाल इस मामले में आरोप लगाने वालों या हो हल्ला करने वालों के पास किसी भी प्रकार का कोई भी ऐसा ठोस प्रमाण नहीं उपलब्ध है जो सिविल लाइंस पुलिस पर लगे आरोपों की ज़रा सा भी पुष्टि करता हो , लेकिन समाज की रक्षा दिन रात जाग कर कर रहे व् आतंक के साथ अपराध से भी लड़ रहे पुलिस बल के खिलाफ ऐसे आरोप लगाना कहीं न कहीं एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए उचित नहीं माना जा सकता है .


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