राजस्थान में इतना प्रताड़ित किया गया पत्रकार कि कर ली आत्महत्या.. अब उसकी रूह को भी तडपा रही जयपुर पुलिस और कांग्रेस सरकार.. हार का बदला पत्रकार से तो नहीं ? ?

कांग्रेस के सांसद और खुद राहुल गांधी लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के ऊपर किसी प्रकार का दबाव न देने के पक्ष में बार बार बयान देते हैं . अभी हाल में ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिपण्णी करने वाले पत्रकार की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने भी कड़ा विरोध जताया था और लोकतंत्र का हनन की संज्ञा आदि दे डाली थी .. लेकिन अगर करीब से देखा जाय तो कांग्रेस शासित प्रदेश में उन हालातों से कहीं दूर पत्रकारों के बद से बदतर हालात हैं .

उन्ही हालातो के चलते कुछ पत्रकार इस हालत में आ गये कि उन्होंने आत्महत्या तक कर डाली क्योकि उनको कांग्रेस शासन और राजस्थान का प्रशासन मौत के बाद भी चैन से नहीं रहने देने पर आमादा है . यद्दपि प्रधानमन्त्री मोदी की फिर से प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस ने मीडिया को बिका हुआ कहा था और कई संस्थानों के खिलाफ उनके नेताओं ने खुली जुबान से जहर उगले थे .. लेकिन कोई नहीं जानता था कि उनको मीडिया या पत्रकार से इतनी नफरत हो जाएगी कि उसको जयपुर जैसे हालात पैदा करने होंगे .

यहाँ पर एक नामी और सम्मानित पत्रकार आलोक शर्मा ने चौतरफा मिल रही प्रताड़ना और दबाव के बाद आत्महत्या कर ली है . उनका शव २८ जून को सी स्कीम स्थित एक कमरे से मृत अवस्था में पाया गया था ..उस समय खुद थानाध्यक्ष मदन बेनीवाल ने बताया था कि उनके शव के पास 5 पेज का सुसाइड नोट मिला था जिसकी जांच की जायेगी . आलोक शर्मा बुलेटिन टुडे के CEO थे जो वेतन न मिलने से आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके थे . उनकी माता को कैन्सर था और उसनके साथ लगभग 45 अन्य लोग भी ऐसे हालत का सामना कर रहे थे .

उन्होंने सुसाइड नोट में अपनी मौत के जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही की मांग अपनी अंतिम इच्छा के रूप में जताई थी पर लोकसभा चुनावों में हार के बाद मीडिया को पूरी तरह से अपना दुश्मन जैसा मान बैठी कांग्रेस पार्टी के शासन ने उनके खिलाफ ही कार्यवाही शुरू कर दी है . अभी तक किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्यवाही तो दूर ठीक से पूछताछ तक नहीं की गई है जबकि पुलिस आरोपियों के बजाय खुद उनकी ही जांच पड़ताल कर रही है जो इस प्रताड़ना के चलते दुनिया को ही विदा कर गये हैं .

इस मामले को स्थानीय समाचार पत्रों ने कई बार प्रमुखता दी, इतना ही नहीं खुद मृतक के बेटे ने DGP तक अपनी गुहार लगाईं और अपने दिवंगत पिता के लिए न्याय माँगा पर स्थानीय थाने से ले कर मुख्यमंत्री तक मीडिया के विरोध दुराग्रह से इतने ग्रसित हैं कि उन्होंने इस मामले में पल भर की भी रूचि नहीं दिखाई जबकि स्थानीय थाने की रूचि आरोपियों को बचाने जैसे संकेत दिए हैं . ये कहना गलत नहीं होगा कि जिस पत्रकार को पहले जीते जी आरोपियों ने प्रताड़ित किया अब उसी की आत्मा को स्थानीय प्रशासन और शासन प्रताड़ना दे रहा..

सवाल और भी उठते हैं कि वर्तमान समय में कांग्रेस के मुख्यमंत्री गहलोत जी और उपमुख्यमंत्री पायलट जी आलोक शर्मा की मौत भर से ही संतुष्ट हैं या अपनी हार के लिए मीडिया को जिम्मेदार मानने की उनकी ये सोच अभी और भी मीडियाकर्मियो की बलि ले कर उनके परिवार को भी त्राहिमाम कह देने तक प्रताड़ित करेगी .. आने वाले समय में दिल्ली और हरियाणा राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हैं , क्या पत्रकार आलोक शर्मा के इसी मामले के साथ सच दिखा रहे मीडिया को एक चेतावनी राजस्थान कांग्रेस सरकार दे रही है कि अगर उनकी सरकार आती है तो मीडिया वाले और उनके परिवार ऐसे हालात के लिए तैयार रहे ?

इन सवालों को बल इस बात से भी मिलता है कि कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में ही हिन्दुओ के पलायन की सच खबर दिखाने वाले सुदर्शन न्यूज के छत्तीसगढ़ संवाददाता योगेश मिश्र को भी इसी प्रकार से प्रताड़ित किया जा रहा है और उनको पुलिस के जोर से जेल भेजने की कोशिश चल रही है . निश्चित रूप से ये कहना सार्थक लग रहा है कि कांग्रेस सरकारों के निशाने पर अब पत्रकार आ चुके हैं जिन्हें या जेल में भेजा जा रहा है या तो मरने पर मजबूर कर दिया जा रहा..  .

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