3 तालक पीड़िता इससे पहले पहुंचती पुलिस के पास, उससे पहले पहुंच गया शौहर उसके पास और बोला- “घर चलो, थाने नहीं”

मुस्लिम महिलाओं को जिस अंतहीन प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने के लिए मोदी सरकार ने तीन तलाक क़ानून बनाया है, उसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं. मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ का है जहाँ तीन तलाक क़ानून के बन जाने के बाद तीन तलाक पीड़िता एक महिला पुलिस थाना जाने की तैयारी कर रही थी. लेकिन इससे पहले कि वह थाना पहुँचती, उसका शौहर उसे मनाने के लिए ससुराल पहुँच गया तथा अपनी बीवी से कहा कि थाने नहीं बल्कि घर चलो, साथ में ही रहेंगे. उसने पत्नी को न सिर्फ अधिवक्ता के समक्ष समझौता नामा लिखकर दिया, बल्कि लगभग 750 वर्ग फुट जमीन पत्नी के नाम करने का भी आश्वासन दिया.

दलित लड़कियां उसके निशाने पर थीं.. उसके हाथ में कलावा होता था और फिर होता था बलात्कार

खबर के मुताबिक़, सहारनपुर में कुतुबशेर के खुंगर कॉलोनी निवासी नसीमा का निकाह वर्ष 2015 में विकास नगर उत्तराखंड के हरबर्टपुर निवासी मो. अली के साथ हुआ था. उनके यहां जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ. नसीमा के अनुसार उसका पति एवं ससुराल के लोगों ने कुछ समय बाद ही उसके साथ मारपीट एवं दहेज के लिए उत्पीड़न शुरू कर दिया. लगभग आठ माह पूर्व उसे मारपीट कर तलाक देने की बात कहते हुए घर से निकाल दिया. तब से वह अपने मायके में आकर रहने लगी.
मामले में समझौते के लिए कई बार पति और ससुरालियों को उसके परिजनों ने बुलाया लेकिन वे आने के लिए तैयार नहीं हुए. उसे पता चला कि उसका पति एवं ससुराल के लोग दूसरी शादी की तैयारी कर रहे हैं. उन्हें जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज के साथ जाकर एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया और कार्रवाई की मांग की. अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि इसी दौरान तीन तलाक के विरुद्ध कानून बन गया. जिसके बाद नसीमा ने पति एवं ससुरालियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर ली.
जब इस बात का पता ससुरालियों को चला तो उन्होंने तुरंत नसीमा और उसके परिजनों से संपर्क किया और नसीमा को घर ले जाने के लिए तैयार हो गए. इसके बाद अधिवक्ता से समझौता नामा तैयार कराया गया. अधिवक्ता की मौजूदगी में नसीमा के पति मो. अली और उसके परिजनों ने हस्ताक्षर किया. मो. अली ने पत्नी नसीमा और उसके बच्चों को अलग मकान में रखने के साथ ही पांच माह में 750 वर्ग फुट जमीन भी नसीमा के नाम करने का लिखित में आश्वासन दिया. मो. अली का इस मामले में कहना है कि वह और उसका परिवार नहीं चाहता कि किसी प्रकार से कोर्ट कचहरी के चक्कर काटे. उनमें आपस में समझौता हो गया है और वह अपनी पत्नी एवं बच्चों को लेकर जा रहा है.
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