बाराबंकी में जहरीली शराब का दोषी निकला “कुरैशी:. शासन और प्रशासन को बदनाम करने की गहरी साजिश

उत्तर प्रदेश में जैसे ही अचानक जहरीली शराब से मौतें होने लगी वैसे ही शासन प्रशासन ने इसकी तह तक जाने का फैसला किया .. हैरानी की बात ये है कि जहरीली शराब से ये मौतें उत्तर प्रदेश के हर कोने को प्रभावित करने लगी .. सबसे पहले सहारनपुर में सनसनीखेज रूप से मौतों का आंकडा 100 के आस पास जाने लगा.. फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश की पुलिस ने कमर कसी और कई लोगों को गिरफ्तार किया और उनके मददगारों को भी. लेकिन अभी ये खत्म नहीं हुआ था .

फिर अचानक ही जहरीली शराब से मौतें पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हो गई और कुशीनगर में भी शराब का ठीक वैसे ही तांडव शुरू हुआ जो सहारनपुर में हुआ था . जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था ही नहीं सीधे योगी आदित्यनाथ के ऊपर सवालिया निशान विपक्ष लगाने लगा .. अभी हालात काबू करने की कोशिश चल ही रही थी कि अब उत्तर प्रदेश के मध्य भाग को निशाना बनाया गया है और वो भी राजधानी से सटे हुए जिले बाराबंकी को .

विदित हो कि बाराबंकी जहरीली शराब काण्ड की परतें जैसे ही खुलनी शुरू हुई , वैसे ही इसमें नाम आने लगे उन दुर्दांत साजिशकर्ताओं के जिनके निशाने पर प्रदेश का प्रशासन ही नहीं बल्कि शासन भी है . योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश उस समय हुआ जब बाराबंकी जहरीली शराब का कनेक्शन लखनऊ से जुडा मिला और इसके पीछे दोषी के रूप में नाम आया शानू कुरैशी का . इसी ने जहरीला थिनर सप्लाई किया था जिसने शराब को जहरीली बनाया था .

रामनगर क्षेत्र में हुए मिलावटी शराब कांड में पुलिस ने एक और बड़े सप्लायर का पता लगाया है। लखनऊ के शानू कुरैशी ने कानपुर से स्प्रिट की जगह थिनर मंगाकर सुनील जायसवाल को सप्लाई की थी। इससे बनी मिलावटी शराब ने 26 लोगों की जान ले ली। बाराबंकी पुलिस ने फरार चल रहे शानू कुरैशी पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित कर दिया ज्ञात था जिसको मुठभेड़ के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है . अब शानू कुरैशी वो तमाम राज खोलेगा कि उसने ऐसा क्यों और किस के कहने पर किया था . कुरैशी के दायें पैर में पुलिस की गोली लगी है जिसका इलाज पुलिस अभिरक्षा में चल रहा है .

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