माँ सरस्वती की पूजा में गई बच्ची के बलात्कारी शहाबुद्दीन तथा सद्दाम को अदालत ने दी ये सजा जबकि देश मांग रहा था फांसी

वो 14 फरवरी 2016 का दिन था जब झारखण्ड के लातेहार के बालुमाथ मे सरस्वती पूजा के विसर्जन यात्रा से वापस लौट रही एक नाबालिग मासूम के साथ मो सद्दाम, मो शहाबुद्दीन तथा एक अन्य नाबालिग दरिन्दे ने क्रूरतम तरीके से सामूहिक बलात्कार को अंजाम दिया था. इसके बाद पूरे देश से दरिंदों के लिए फांसी की सजा की मांग हुई थी, जिसमें अब न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है.

खबर के मुताबिक़, पोक्सो एक्ट के तहत गठित विशेष अदालत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राषिकेश कुमार की अदालत ने गैंगरेप मामले के एक आरोपी की सुनवाई पूरी होने पर आजीवन कारावास एवं 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी है. छात्रा के साथ दुष्‍कर्म करने के आरोप में बालुमाथ निवासी मो सद्दाम, मो शहाबुद्दीन और एक नाबालिग के विरूद्ध बालुमाथ थाना में कांड संख्या 20/2016 भादिव की धारा 376 (डी) एवं पोक्सो की धारा 04, 06 एवं 08 के तहत प्राथमिकी दर्ज किया गया था.

आपको बता दें कि थमिकी दर्ज होने के उपरांत उक्त तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा था. मामले का विचारण पोक्सो एक्ट 2012 के तहत गठित श्री कुमार की विशेष अदालत में हुआ. जिसमें एक आरोपी को नाबालिग घोषित किया गया और मामले को किशोर न्याय बोर्ड में विचारण हेतु भेजा गया. जबकि मो सद्दाम एवं मो सहाबद्दीन का विचारण विशेष अदालत में किया गया. उक्त मामले में अभियोजन पदाधिकारी बलराम साह ने कुल 11 गवाहों को पेश किया था. जिसमें पीड़िता का दप्रसं की धारा 164 के तहत बयान कलमबद्ध करने वाले जज संदीप निशित बाड़ा की गवाही उक्त अदालत में करायी गयी थी. गवाहों की गवाही के उपरांत विचारण अदालत ने दो आरोपियों मो सद्दाम एवं मो शहाबुद्दीन को नाबालिग के साथ दुष्‍कर्म करने का आरोप सत्य पाया.

अदालत ने गत 13 मार्च को फैसले की तिथि निर्धारित की थी. उक्त तिथि को मो शहाबुद्दीन अदालत में उपस्थित नहीं हुआ तब फैसले की तिथि 15 मार्च निर्धारित की गयी और मो सद्दाम को दोषी पाया गया. 16 मार्च को श्री कुमार की विशेष अदालत ने खुली एवं खच्चाखच भरी अदालत में पोक्सो एक्ट 2012 के तहत आजीवन सश्रम कारावास एवं 25 हजार जुर्माना की सजा सुनायी. अदालत ने जुर्माना की राशि पीड़िता को देने का आदेश पारित किया है तथा जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा मुकरर की है.

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