गुजरात के पटेलों पर चरमपंथियों के हमले के बाद गुजरात पुलिस ने बहादुरी से बचाए पीडितो के प्राण लेकिन जनता पूछ रही हार्दिक पटेल के ख़ामोशी की वजह


अभी कुछ समय पहले की ही बात है . ये चुनावो से ठीक पहले की जब गुजरात की जनता ने एक कड़े संघर्ष के बाद एक बार फिर से अपना मुखिया भारतीय जनता पार्टी को चुन लिया था . उस से पहले गुजरात में हुए उन्माद को हर किसी ने देखा था और हिन्दू समाज को जातियों के नाम पर बांटने के षड्यंत्र को भी समझा था.. उस समय एक नाम बहुत चर्चित हुआ था जिसको राहुल गांधी तक ने परोक्ष समर्थन दिया और बाद में वही JNU की उस टीम से मिल गया था जिसको टुकड़े टुकड़े गैंग कहा जाता है .

इनका नाम है हार्दिक पटेल.. गुजरात की चनाव पूर्व हिंसा में इनकी भूमिका क्या और कितनी रही इसको तमाम लोग जानते हैं.. इन्होने तमाम प्रयास कर डाले की गुजरात में एक अच्छी खासी तादाद रखने वाला पटेल समुदाय इनके पक्ष में आ जाए . इन्हें उस समय तमाम विपक्षी पार्टियों ने समझाने के बजाय प्र्तोसहन दिया और एक बार तो राजनैतिक गलियारों में भी माना जाने लगा था कि हार्दिक पटेल गुजरात विधानसभा का चुनाव प्रभावित कर सकते हैं .

उस समय ममला दिया गया था पटेल आरक्षण का और हार्दिक पटेल ने पटेलों की भलाई और बेहतरी के लिए जान तक देने का एलान कर डाला था.. लेकिन अचानक ही गुजरात में एक नये विवाद ने उनके मन में पटेलों के लिए सम्मान और चिंता पर सवालिया निशान लगा दिया है .. गुजरात के आनंद जिले में मजहबी  उन्मादियो ने पटेलों पर हमला कर दिया और उस संघर्ष में 2 लोगों की मौत हो गई . दोनों पक्षों में तनाव फ़ैल गया और देखते ही देखते पथराव आदि शुरू हो गया .

मामले की गंभीरता को गुजरात सरकार ने फ़ौरन समझा और पुलिस बल ने इलाका घेर लिया .. देखते ही देखते इलाका पुलिस छावनी बन गया और हालत तत्काल काबू में आये.. यद्दपि इस मामले में उन्मादियो ने पुलिस पर भी हमला किया है.. उस क्षेत्र के पटेलों ने लगातार इंतजार किया हार्दिक के आने का और उन्मादियो के खिलाफ कानूनी संघर्ष में उनका साथ देने का लेकिन हार्दिक पटेल का खुद आना तो दूर , अब तक उनका एक ट्विट भी इस मामले में नहीं आया .

पटेलो पर हमले के बाद हार्दिक पटेल की ख़ामोशी को तुष्टिकरण की पराकाष्ठा माना जा रहा है और कई लोग उनका झुकाव पटेलो के बजाय उन्मादियो की तरफ मान रहे हैं . फिलहाल गुजरात प्रशासन ने तत्काल मुस्तैदी और सख्ती दिखाते हुए हालत को काबू किया है और इलाके में ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी सघन नजर लगाये हुए हैं.. हार्दिक पटेल के बचे खुचे जनाधार पर ये घटना प्रश्नचिंह लगा देगी ऐसा माना जा रहा है जो मात्र एक ट्विट भी अब तक नहीं कर पाए हैं .


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