सुदर्शन न्यूज़ की खबर तथा सोशल मीडिया की एकता के बाद ऋचा भारती मामले में बड़ी कार्यवाही.. एक्शन में आई रघुबर सरकार


सुदर्शन की खबर तथा उस खबर पर हिन्दुओं के आक्रोश व सोशल मीडिया की एकता के बाद ऋचा भारती मामले में बड़ी कार्यवाई होने जा रही है. शायद इसी एकता का ही परिणाम था कि पहले रांची कोर्ट ने ऋचा भारती को जमानत देने में लगाई गई उस शर्त को वापस लिया जिसमें कहा गया था कि ऋचा भारती को कुरान की किताबें बांटनी होंगी. ऋचा भारती मामले में इधर कोर्ट ने कुरान बांटने के अपने आदेश को वापस लिया तो उधर राज्य की रघुबर दास सरकार भी एक्शन में नजर आ रही है.

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खबर के मुताबिक़, ऋचा भारती प्रकरण में रांची के  पिठोरिया थानेदार सहित कई पुलिस अफसरों को हटाया जा सकता है. इस संबंध में राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी गयी है. रिपोर्ट में ग्रामीण एसपी आशुतोष शेखर, एएसपी अमित रेणु और पिठोरिया थाना प्रभारी विनोद राम द्वारा शाम सात बजे के बाद बिना किसी महिला पुलिस अधिकारी के ऋचा को गिरफ्तार कर जेल भेजने पर सवाल उठाया गया है. कहा गया है कि पुलिस अफसरों के इस कृत्य से हिंदू संगठनों में सरकार के खिलाफ रोष है.

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रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य की रघुबर दास सरकार एक्शन में आ गई है तथा उन अधिकारियों के बाद कड़ा एक्शन लिया जा सकता है, जिन्होंने इस मामले में लापरवाही बरती तथा गलत तरीके से ऋचा भारती को गिरफ्तार किया. इसके बाद जिस तरह से इस मुद्दे ने तूल पकड़ा तथा न सिर्फ झारखण्ड बल्कि देशभर के हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ऋचा भारती के समर्थन में प्रखर तरीके से आवाज उठाई, उससे रघुबर दास सरकार अपने अधिकारियों की कार्यवाई से नाराज है तथा मामले में लापरवाही दिखाने वाले अधिकारीयों पर राज्य सरकार का डंडा चल सकता है.

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बता दें कि कोर्ट के कुरआन बांटने के आदेश के बाद जहाँ देशभर के हिन्दू आक्रोश व्यक्त कर रहे थे तो वहीं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ट्वीट कर ऋचा भारती का समर्थन किया था. स्वामी ने कहा था कि ऋचा पटेल इस मामले को लेकर इश भंडारी से संपर्क कर सकती है. भंडारी इस तरह के मामले के जानकार हैं. वह भी उसकी कोर्ट में मदद करेंगे. कुरान की प्रति बांटने का मतलब है, एक ऐसे गुट की विचारधारा के साथ सहमत होना, जो काफिर और इसके परिणाम की बात करते हैं. स्वामी ने लिखा है कि ऋचा दूसरों के धर्म ग्रंथ को नहीं बांट सकती.

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