जैसलमेर में शरण पाए पाकिस्तानी हिन्दू भी कराह उठे.. बोले– “पशुओं जैसा हो चुका जीवन, वर्षों से बस एक खूंटे से बंधे हैं क्योंकि सरकार ने नहीं दी नागरिकता”

पाकिस्तान हमारा घोंसला हुआ करता था, जिसे छोड़कर हम भारत आ गए… ताकि हमारे बच्चे उड़ सकें.’ लेकिन भारत आये हुए वर्षों बीत गये, हमें भारतीयों ने अपना लिया लेकिन भारत सरकार अभी तक नहीं अपना सकी, इसी बात का दुःख है. ये कहना है पाकिस्तान छोड़कर राजस्थान के जैसलमेर में रह रहे हिन्दुओं का. पाकिस्तान में पैदा हुए, पढ़ाई-लिखाई, शादी-ब्याह, बच्चे-रिश्तेदार, सब पाकिस्तान में हुए लेकिन अब वो सब छोड़कर हिन्दुस्तान में आ पहुंचे हैं, भारतमाता की गोद में आ पहुंचे हैं और हिंदुस्तान को ही अपना घर बनाना चाहते हैं, लेकिन अभी तक हमे भारतीय नागरिकता नहीं मिली है. ये कहना है जैसलमेर में रह रहे पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों का.

पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत में शरण लिए पाकिस्तान हिंदूओं ने अब भारतीय नागरिकता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है.राजस्थान के जैसलमेर में रह रहे पाकिस्तान से आए हिंदूओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी हमारी मदद करें. हमें भारत की नागरिकता प्रदान की जाए ताकि हम यहां पर अधिकार के साथ रह सके और वोट दे सकें. इनका कहना है कि मोदी जी इनकी गुहार सुनेंगे. जैसलमेर में तंगहाली में रह रहे पाक हिंदू जैसे-तैसे जिंदगी काट रहे हैं लेकिन ये लोग दुबारा पाकिस्तान नहीं जाना चाहते हैं. इनका मानना है कि भारत सरकार न्याय करेगी तथा अब वह अपनी भारतमाता की गोद छोड़कर वापस पाकिस्तान नहीं जाने वाले हैं.

पाकिस्तान छोडकर राजस्थान के जैसलमेर में रह रहे हिन्दुओं का कहना है कि पाकिस्तान में जब घर से निकलते थे तो इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं होता था कि वापस आ पाएंगे या नहीं.” अपहरण जैसी घटनाओं के अलावा बच्चों का भविष्य बनाने की चिंता भी थी. उन्होंने कहा, “वहां पर बच्चों की बेहतर परवरिश एक बड़ा सवाल है. परवरिश का इतना मसला है तो करियर की बात ही क्या करें…हम लोग कई दफ़ा घूमने के भारत आए थे. यहां के हालात वहां से ठीक जान पड़े तो तय किया कि बच्चों की ख़ातिर पाक़िस्तान छोड़ने में ही भलाई है.” भारत में हमें अपने धर्म को मानने की आज़ादी है. यहाँ हम कह सकते हैं कि हम हिन्दू हैं लेकिन वहां हम एक कमरे में बंद हो गए थे. हम अपना सबकुछ छोड़कर आए थे. सिर्फ़ कुछ बर्तन थे और कपड़े. खाने-पीने का सामान लेकर आए थे क्योंकि पता नहीं था कि यहां हमारे साथ क्या होने वाला है. वो कहते हैं कि वह अपने फ़ैसले से खुश हैं लेकिन तकलीफ़ ये है कि इतने साल बाद भी हम जिस देश को दिल से अपना चुके हैं, उसने कागज़ों में हमें बेगाना बना रखा है. उनका दावा है कि भारत के लोगों ने उन्हें अपना लिया है लेकिन काग़जों में वो अब भी पाकिस्तानी हैं. उनका कहना है कि उन्हें मोदी जी पर पूरा भरोसा है कि वह हमें भारतीय नागरिकता दिलाएंगे.

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