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कश्मीर के आतंकवाद से भी कहीं बढ़कर है राजस्थान में गौतस्करी का अपराध… देखिये आंकड़े और जानिये गौहत्यारों का दुस्साहस

राजस्थान के अलवर में गौतस्कर रकबर खान की ह्त्या के बाद देशभर में गौतस्करी तथा मॉब लिंचिंग को लेकर बहस छिड़ी हुई है. मॉब लिंचिंग को लेकर एक तरफ जहाँ मॉब लिंचिंग को बहाने हिन्दू संगठनों तथा गौरक्षकों को निशाने पर लिया जा रहा है तो वहीं दुसरी तरफ इसी मॉब लिंचिंग की आड़ में गौतस्करी का बचाव करने का नापाक प्रयास भी किया जा रहा है. लेकिन जब आप राजस्थान में गौतस्करी की हकीकत देखेंगे तो ये काफी भयावह करने वाली है. जिस तरह से कश्मीर आतंक से जूझ रहा है, राजस्थान में उससे भी ज्यादा गौतस्करी का अपराध फल-फूल रहा है.

पिछले सत्र में राजस्थान विधानसभा में राजस्थान सरकार की तरफ से गौतस्करी की तरफ से जो आंकड़े पेश किये गये थे, वो काफी भयावह तथा शर्मनाक भी थे. बताया गया था कि राजस्थान में पिछले तीन सालों के दौरान पुलिस और गौ-तस्करों के बीच 33 बार फायरिंग की घटनाएं हुई थी और एक गौ-तस्कर इस फायरिंग में मारा गया था. राजस्थान विधानसभा में हीरालाल नागर के प्रश्न के जवाब में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने बताया कि वर्ष 2015 से वर्ष 2017 के बीच गौ-तस्करी के कुल 1113 मामले दर्ज हुए थे. इस दौरान पुलिस ने 16 हजार 428 गौवंश बरामद किया और 2198 गौ-तस्करों को धरदबोचा. पुलिस ने इस दौरान 1051 वाहन जब्त भी किये. अभी 931 मामलों में चालान पेश किया जा चुका है, जबकि 122 मामलों में एफआर लग चुकी है. हीं 60 मामले लंबित है. आज जिस अलवर की घटना को लेकर तूफ़ान मचा हुआ है, सबसे ज्यादा गौ-तस्करी के मामले इसी अलवर जिले में दर्ज हुए है और अलवर में ही वर्ष 2017 में फायरिंग के दौरान एक गौ-तस्कर की मौत हो गई थी.

विधानसभा में पेश जवाब के मुताबिक वर्ष 2015 में अलवर में 160 केस गौ-तस्करी के मामले दर्ज हुए. इस दौरान 909 गौवंश बरामद किया गया, जबकि 160 वाहन जब्त किए गए और गौ-तस्करी के आरोप में 226 लोगों को पकड़ा गया. वहीं वर्ष 2016 में 117 मामले गौ-तस्करी के मामले दर्ज हुए, 1043 गौवंश बरामद हुआ, 117 वाहन जब्त किए गए और 248 लोगों को पकड़ा गया. जबकि वर्ष 2017 में 94 मामले गौ-तस्करी के केस दर्ज हुए, 482 गौवंश बरामद हुआ, 94 वाहन जब्त किए गए और 108 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

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