लड़कियों के पिता धिक्कार कर जाते थे लड़के के घर वालों को.. बोलते थे कि- “डूब मरो, इतने हिन्दुओं के होते हुए भी गाँव का नाम मुगलों का”


वीरभूमि राजस्थान के बाड़मेर में के एक गाँव मियाँ का बाड़ा में एक हिन्दू युवा की शादी में इसलिए रूकावट आयी क्योंकि लडकी के परिजनों ने लडके वालों से कह दिया कि तुम हिन्दू बाहुल्य गाँव में रहते हो लेकिन डूब मरो कि तुम्हारे गाँव का नाम आज भी मुगलों के नाम पर है. आप लोग आपने को आजाद कहते हो लेकिन आप आज भी मुगलों की निशानी के गुलाम हो. ये बात केवल बाड़मेर की नहीं है बल्कि राजस्थान के कई जिलों के कई गांवों की है जहाँ हिन्दू आबादी बहुतायत है लेकिन गाँव के नाम मुगलों के नाम पर हैं, यही कारण है कि इस गांवों के युवाओं की शादी में रुकावट आ रही है क्योंकि लडकी वाले इन गांवों के नाम को गुलामी का प्रतीक मानते हैं.

ग्रामवासियों की इस आपत्ति के बाद राजस्थान सरकार ने ऐसे गाँवों के नाम बदलना शुरू कर दिए हैं तथा इन गांवों के नये नाम वैदिककालीन नामों पर रखे जा रहे हैं. राज्य सरकार ने केंद्र से 27 गांवों के नाम बदलने की मांग की थी. इनमें से आठ के लिए मंजूरी मिल गई. सरकार के मुताबिक, कई लोगों ने शिकायत की थी कि उनके गांवों के नाम मुस्लिम होने की वजह से हिंदू युवाओं की शादी में दिक्कत आ रही थी. इसके बाद पंचायत स्तर से ही नाम बदलने का प्रस्ताव आया था. खबर के मुताबिक़, राजस्थान के बाडमेर का ‘मियां का बाड़ा’ का नाम अब महेश नगर हो गया है. ‘मियां का बाड़ा’ नाम के साइनबोर्ड हटाकर जिला कलेक्टर हर जगह महेश नगर का साइन बोर्ड लगा रहे हैं. स्कूल से लेकर पंचायत भवन तक सभी नए सिरे से नए नाम से पुतवाए जा रहे हैं. गांव के लोगों का कहना है कि मियां शब्द मुस्लिम लोगों के लिए प्रयोग होता है और बाड़ा मतलब रहने की जगह होती है ऐसे में ऐसा प्रतित होता था कि ये मुस्लिमों का गांव है जबकि केवल तीन घर में 21 लोगों की मुस्लिम आबादी है. गांव के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह का कहना है कि मुगल काल में इसका नाम महेश नगर था जिसे बाद में बदलकर ‘मियां का बाड़ा’ कर दिया गया. महेशनगर के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह ने बताया कि दस साल पहले हमने मारवाड़ राजघराने से दस्तावेज निकालकर राजस्थान सरकार को पेश किया था मगर खुशी है कि अब जाकर हमारी यह मांग पूरी हुई है.

राजस्थान सरकार के राजस्व राज्यमंत्री अमराराम ने कहा कि मियां के बाड़ा में तीन मुस्लिम परिवार रहता है ऐसे में इसका नाम ‘मियां का बाड़ा’ क्यों रखा जाए हमने पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद नाम बदला है. ‘मियां का बाड़ा’ अकेले महेश नगर नहीं बना है बल्कि अजमेर जिले के किसनगढ़ के सलेमाबाद का नाम भी बदलकर श्री निंबार्क तीर्थ कर दिया गया. राजस्थान में कई गांव ईस्माईलपुर के नाम से है क्योंकि जयपुर के नगर नियोजक मिर्जा ईस्माईल थे जिनके नाम पर आज भी जयपुर का एमआई रोड है. एक ईस्माईलपुर का नाम पिचनवा खुर्द रख दिया गया है, जबकि दूसरे इस्माईलपुर का नाम कौशलनगर या ईश्वर नगर रखना चाहते हैं. यहां के लोगों का कहना है कि गांव में हिंदू आबादी ही है ऐसे में मुस्लिम नाम रखने का कोई औचित्य नहीं है. सरपंच नितीराज सिंह ने बताया कि हम काफी लंबे समय से नाम बदलने की मांग कर रहे हैं. हमारे गांव में कोई मुस्लिम परिवार नही रहता इसलिए नाम बदला जाना चाहिए. इसके बाद सरकार ने भी इस पर काम करना शुरू कर दिया है तथा बाड़मेर, चित्तौड़ सहित कई जिलों के ऐसे गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...