वैदिक काल की तरफ राजस्थान… बदल रहे हैं गांवों के वो नाम जो थे कभी वैदिक काल में

राजस्थान सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिससे न सिर्फ राजस्थान बल्कि देशभर का हिन्दू समाज झूम उठा है. राजस्थान सरकार ऐसे हिन्दू बाहुल्य गाँवों जिनका नाम मुस्लिम के नाम है, उन्हें बदल रही है तथा वैदिककालीन नाम रखने जा रही है. राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की सिफारिश पर भारत सरकार ऐसे करीब 15 गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग गांव के नए नामों का गजट प्रकाशित कर रही है. सरकार का कहना है कि गांव की पंचायत की सिफारिश पर यह सब किया जा रहा है. गांव के लोगों का कहना है उनकी ये मांग लंबे समय से थी जिसकी सुनवाई अब जाकर हो रही है.

इसकी शुरुआत राजस्थाने बाड़मेर जिले से हुई है. खबर के मुताबिक़, राजस्थान के बाडमेर का ‘मियां का बाड़ा’ का नाम अब महेश नगर हो गया है. ‘मियां का बाड़ा’ नाम के साइनबोर्ड हटाकर जिला कलेक्टर हर जगह महेश नगर का साइन बोर्ड लगा रहे हैं. स्कूल से लेकर पंचायत भवन तक सभी नए सिरे से नए नाम से पुतवाए जा रहे हैं. गांव के लोगों का कहना है कि मियां शब्द मुस्लिम लोगों के लिए प्रयोग होता है और बाड़ा मतलब रहने की जगह होती है ऐसे में ऐसा प्रतित होता था कि ये मुस्लिमों का गांव है जबकि केवल तीन घर में 21 लोगों की मुस्लिम आबादी है. गांव के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह का कहना है कि मुगल काल में इसका नाम महेश नगर था जिसे बाद में बदलकर ‘मियां का बाड़ा’ कर दिया गया. महेशनगर के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह ने बताया कि दस साल पहले हमने मारवाड़ राजघराने से दस्तावेज निकालकर राजस्थान सरकार को पेश किया था मगर खुशी है कि अब जाकर हमारी यह मांग पूरी हुई है.

राजस्थान सरकार के राजस्व राज्यमंत्री अमराराम ने कहा कि मियां के बाड़ा में तीन मुस्लिम परिवार रहता है ऐसे में इसका नाम ‘मियां का बाड़ा’ क्यों रखा जाए हमने पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद नाम बदला है. ‘मियां का बाड़ा’ अकेले महेश नगर नहीं बना है बल्कि अजमेर जिले के किसनगढ़ के सलेमाबाद का नाम भी बदलकर श्री निंबार्क तीर्थ कर दिया गया है. सलेमाबाद के सरपंच धरणीधर उपाध्याय ने बताया कि नाम यहां के रहने वाले जागीरदार सलीम खान के नाम पर पड़ा था, लेकिन यहां हिंदूओं के निंबार्क तीर्थ होने की वजह से लंबे समय से इसका नाम बदलने की मांग हो रही थी. यहां पर मात्र एक मुस्लिम परिवार रहता है. राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने तो भारत सरकार की सहमति से पहले ही यहां के स्कूल के नाम में निंबाकाचार्य जोड़ दिया है. झूंझनू में दो इस्माईलपुर हैं जहां पर केवल हिंदुओं की आबादी है. राजस्थान में कई गांव ईस्माईलपुर के नाम से है क्योंकि जयपुर के नगर नियोजक मिर्जा ईस्माईल थे जिनके नाम पर आज भी जयपुर का एमआई रोड है. एक ईस्माईलपुर का नाम पिचनवा खुर्द रख दिया गया है, जबकि दूसरे इस्माईलपुर का नाम कौशलनगर या ईश्वर नगर रखना चाहते हैं. यहां के लोगों का कहना है कि गांव में हिंदू आबादी ही है ऐसे में मुस्लिम नाम रखने का कोई औचित्य नहीं है. सरपंच नितीराज सिंह ने बताया कि हम काफी लंबे समय से नाम बदलने की मांग कर रहे हैं. हमारे गांव में कोई मुस्लिम परिवार नही रहता.

चित्तौडगढ़ जिले की भदेसर तहसील का राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार मंडफिया गांव देश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. यहां सांवलिया सेठ का विशाल मंदिर है, जिसका अक्षरधाम की तर्ज पर विकास हुआ है. ऐसे में सांवलिया सेठ का नाम प्रदेशवासियों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है. सुबह उठते ही लोग सांवलियाजी का नाम ही लेते हैं, ऐसे में गांव की पहचान भी सांवलियाजी के रूप में ही बन गई है. लंबे समय से मंडफिया गांव का नाम सांवलियाजी करने की मांग उठती आई है. आज भी इस गांव का मंडफिया ही है. ऐसे में कई बार श्रद्धालुओं को दिक्कत का सामना करना पड़ता है. भीलवाड़ा जिले की सीमा पर मंडपिया गांव भी है, ऐसे में कई बार सांवलियाजी की डाक सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज जिनमें चढ़ावे में आने वाले चेक, मनीऑर्डर आदि भी समय पर नहीं पहुंचते. जिसके चलते क्षेत्रवासियों की भावना है कि गांव का नाम सांवलियाजी हो. चित्तौड़ के ही मोहम्मदपुरा का नाम मेडी का खेड़ा, नवाबपुरा का नाम नईसरथल, रामपुर-आजमपुर का सीताराम जी का खेड़ा रखने का नाम भी प्रस्तावित है.

Share This Post

Leave a Reply