राजस्थान पुलिस से कश्मीरी आतंकियों के अंदाज में लड़े गौ हत्यारे…24 गायें मुक्त हुईं.. खमोश हैं रकबर के रहबर

राजस्थान के अलवर में गौ हत्यारे रकबर खान की मौत के बाद पूरे हिन्दू समाज को सर पर उठाने वाले राजनैतिक दल तथा तथाकथित बुद्धिजीवी उस समय खामोश हो गये जब एक बार पुनः राजस्थान में गौतस्करी की घटना सामने आयी जहाँ गौ हत्यारों ने राजस्थान की जांबाज पुलिस पर कश्मीरी आतंकियों के अंदाज में भयंकर गोलीबारी की. लेकिन राजस्थान पुलिस के बल तथा पराक्रम के आगे उनकी एक न चली, जिसके बाद गौ हत्यारे भाग खड़े हुए तथा पुलिस बल ने 24 गायों को मुक्त करा लिया.

घटना राजस्थान के भरतपुर की है, जहां देर रात गौ-तस्करों की पुलिस से मुठभेड़ हो गई. पुलिस से सामना होते ही गौ-तस्कर फायरिंग करते हुए ट्रक छोड़कर भाग खड़े हुए. देर रात की इस घटना में आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे पर सारस चौराहे केे पास एक ट्रक पुलिस बैरियर तोड़कर आगरा की ओर भाग निकला. इसके तुरंत बाद हरकत में आई पुलिस ने जिले में नाकेबंदी कर दी. तभी पुलिस से सामना होने पर ट्रक में सवार गौ-तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग शुरु कर दी और ट्रक को लेकर जंगल की तरफ भागने की कोशिश करने लगे. हालांकि, आगे जाकर गाेवंश से भरा ट्रक जंगी के नगला के निकट सड़क किनारे कीचड़ में फंस गया, जहां पुलिस को पीछे आते देख गौ-तस्कर गाड़ी छोड़कर फरार हो गए. इस दौरान पुलिस उनके पीछे लगी रही पर अततः गौ-तस्कर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकलने में कामयाब रहे. अभी तक उनकी तलाश जारी है. बाद में पुलिस ने ट्रक जब्त कर गोवंश को आजाद कराया, जिसमें से कुछ गोवंश मृत पाए गए.

भरतपुर जनपद के रूपवास थानाधिकारी मदन मीणा के अनुसार गौ-तस्करी किए जाने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम से मिली थी. माना जा रहा है कि फरार गौ-तस्कर उत्तर प्रदेश की आेर भागे हैं. घटना के बारे में बात करते हुए एएसपी प्रकाश चंद्र शर्मा ने बताया कि पुलिस ने सूचना मिलते ही गौ तस्करों को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन गौ तस्करों के ट्रक ने कई बार पुलिस नाकेबंदी को तोड़ा और फरार हो गए. फिलहाल, बरामद किए गए गोवंश को गौशाला भेज दिया गया है। जबकी, मृत पाए गए करीब 13 गोवंश का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि व गौ ह्त्या न होने देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा पुलिस ने जनता से अपील की कि अगर कोई ऐसी घटना सामने आती है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें क्योंकि पुलिस को अगर जनता का सहयोग मिलता है तो पुलिस पूरी ईमानदारी के साथ अपराधीकरण के खिलाफ लड़ सकती है.

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