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संस्कृत का वो स्कूल जहाँ गूंजते थे वेदमन्त्र, उसके विरुद्ध आया एक फरमान जिसके आगे रो कर हाथ जोड़े छात्रों ने लेकिन नही माना वसुंधरा सरकार का अधिकारी

अभी हाल में ही ये शासन मुस्लिम विद्यालय को खोल कर काफी चर्चा में आया था . मदरसों को अनुदान भी यहाँ से अच्छा खासा जारी होता है लेकिन जब बात आई देववाणी संस्कृत की तब ये दोगला व्यवहार दर्द दे रहा है उन तमाम सनातन संस्कृति के पथिको को जिन्होंने प्रदेश की बागडोर वसुंधरा सरकार को थमाते हुए तमाम आशाएं रखी रही होंगी . ये मामला है विधानसभा चुनावों के बेहद करीब खड़े राजस्थान की . ये वो प्रदेश है जहाँ एकतरफा अन्याय की शिकार है संस्कृत भाषा .. राजस्थान प्रदेश की जनता के लिए एक संस्कृत स्कूल को बंद करने का सरकारी फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है . 

जहाँ तरफ सरकार संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने में लगी है वही खेतड़ी में संस्कृत स्कूल सरकारी सिस्टम की वजह से 120 छात्र-छात्राओं का भविष्य सड़क पर आया हुआ है मामला है कस्बे की राजकीय संस्कृत उच्च प्राथमिक विद्यालय का इस स्कूल में कुल 120 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं जिनमें से आधे साठ छात्र-छात्राएं मुसलमान वर्ग के हैं यही संस्कृत स्कूल है जहां हिन्दू समाज के बच्चे गायत्री मंत्र व संस्कृत के श्लोक सीख रहे हैं यह स्कूल 2 साल पहले वार्ड नंबर 8 मैं चल रही थी लेकिन स्कूल व आसपास के भवन जर्जर होने की वजह से सार्वजनिक निर्माण विभाग ने भी वहां पर बच्चों की पढ़ाई करवाना खतरे से खाली नहीं बताया था.

इस पर प्राथमिक स्कूल चल रही वहां पर शिफ्ट किया था अब स्कूल मे कमरे होने के बावजूद संस्कृत स्कूल को शिफ्ट कराने पर तुले हुए हैं उनका कहना है संस्कृत स्कूल अलग विभाग है हमारी स्कूल खाली करनी पड़ेगी। अब बीईईओ रूपेंद्र सिंह ने अपने तुगलकी आदेश से इस स्कूल को प्राथमिक स्कूल से हटाने के आदेश दिए हैं अगर नहीं हटाया तो कानूनी कार्रवाई व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने की धमकी दी जा रही है इस से डरकर संस्कृत स्कूल के अध्यापकों ने छात्रों को बाहर सड़क पर बिठाकर ही पढ़ाना शुरू कर दिया। पहले तीन कमरों में बैठा कर पढ़ाई की जाती थी वही अब सिर्फ एक कमरा इसमें ऑफिस भी है और 8 क्लास तक पढ़ाई भी करवानी पड़ रही है।

सरकारी सिस्टम की वजह से अब यह स्कूल बंद होने के कगार पर है अभिभावकों ने कहां है उस जर्जर भवन में हम अपने बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे। हमारे बच्चों की टीसी कटवाकर निजी विद्यालय में पढा लेंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारी रुपेंद्र सिंह की हठधर्मिता से साफ जाहिर होता है कि बरसों पुराना जो भारत की पुरानी शिक्षा पद्धति का संस्कृत विधालय अब बंद होने की कगार पर है। कुल मिला कर भारत ही नहीं संसार की सबसे प्राचीन और देवताओं की वाणी कही जाने वाली संस्कृत भाषा की ये दुर्दशा हर किसी को विदीर्ण करने वाली है और सबने किसी भी हाल में इस संस्कृत विद्यालय को बन न करने की मांग की है . 

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