कभी अवैध खनन और जातीय हिंसा के लिए चर्चित रहा सहारनपुर अब बदल गया है .. मिलिए इस बदलाव के सूत्रधार से

निम्नलिखित बातें अतीत की हैं – 

कुछ समय पहले की बात है, जब कोई सहारनपुर का नाम लेता था तो सामने वाले के सामने कुछ चीजें अपने आप दिमाग में आ जाया करती थीं.. इसमें सबसे पहले नाम आता था खनन का , यमुना नदी का सीना चीर कर , प्रकृति को असंतुलित कर के जिस प्रकार से सहारनपुर को खनन का केंद्र बना दिया गया था वो इस जिले की छवि को प्रभावित करता था. इसी के चलते यहाँ से राजस्व को कभी भारी हानि हुआ करती थी जिस पर लगाम लगाने की मांग बराबर उठा करती थी .

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इसके अलावा सहारनपुर साम्प्रदायिक तनाव आदि के चलते कभी जाना जाता था. विशेष रूप से अगर शहर की बात की जाय तो ये जनपद मिश्रित आबादी का है . यहाँ सभी मत मजहब के लोग रहते हैं जिसमे हिन्दू और मुस्लिम की आबादी का अनुपात सबसे ज्यादा है.. पिछले कुछ समय पहले यहाँ छोटी छोटी बातें भी तनाव की वजह बन जाया करती थीं . इसको रोकने के लिए जो कदम उठाये जाते थे वो निश्चित रूप से प्रभावी नहीं हुआ करते थे क्योकि कुछ समय बाद वही समस्या फिर उभर जाया करती थी ..

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इसके अलावा बीच में जो एक नया विवाद सामने आया था वो था जातीय विवाद.. इसी के चलते एक नई आर्मी बनाने की कोशिश हुई थी जिसको भीम आर्मी का नाम दिया गया था.. इसके मुखिया रावण ने उस समय के प्रशासन के आगे जो उत्पात मचाया था वो पूरे भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भारत की एक नई और गलत छवि बनाने के लिए काफी था .. अफ़सोस की बात है कि तत्कालीन प्रशासन ऐसे उत्पातियो का दमन प्रभावी रूप से नहीं कर पाया था ..

अब बात वर्तमान की – 

जो सहारनपुर कभी अवैध खनन का केंद्र था उस पर अब प्रभावी अंकुश लगाया जा चुका है.. यहाँ खनन विभाग से ज्यादा पुलिस प्रशासन इसके लिए प्रसंशा का पात्र है . वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री दिनेश कुमार पी ने आते ही यहाँ की सबसे मूल समस्या अवैध खनन को परख लिया था और उसके लिए अपने अधिनस्थो के साथ मिल कर ऐसी रणनीति बनाई थी कि सहारनपुर में वो अवैध खनन काफी हद तक काबू हो गया जिसको रोक पाना कभी असम्भव कहा जाता था .. यहाँ ये याद रखना जरूरी है कि काबू के इस प्रयास में खनन विभाग की भागीदारी पुलिस की अपेक्षा बहुत कम है .

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इसके अलावा अगर बात दूसरी समस्या साम्प्रदायिक तनाव की हो तो जब से वर्तमान पुलिस प्रभारी ने चार्ज सम्भाला है तब से कही भी कोई भी ऐसी साम्प्रदायिक घटना नहीं घटी है जो लखनऊ में बैठे सत्ताधीशो के लिए चिंता की वजह या जवाब देने का कारण बने.. साम्प्रदायिक उन्मादियो के अंदर ये संदेश बिना शोर शराबे के या बिना अतिरिक्त बल प्रयोग के पहुच गया कि पुलिस क्या होती है और उन्होंने खुद का रास्ता बदल लेना ही बेहतर समझा.. इसी के चलते निश्चित रूप से सहारनपुर आज प्रदेश के साम्प्रदायिक दृष्टिकोण से सबसे शांत जिलों में गिना जाता है .

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तीसरा और सबसे जरूरी बिंदु है जातीय संघर्ष का.. यहाँ पर जिस भीम आर्मी ने किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी के समय काल में सबसे ज्यादा चरमता हासिल की थी , उत्पात के लिए कुख्यात वही भीम आर्मी वर्तमान समय में अपने सबसे निचले स्तर पर है.. कभी जिस भीम आर्मी के उत्पात के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को विपक्ष ने कटघरे में ले रखा था आज उस आर्मी को ये संदेश चला गया है कि सहारनपुर में कोई तथाकथित आर्मी नहीं बल्कि खाकी द्वारा संचालित कानून ही लागू होगा और उसका पालन कर किसी को करना होगा .. खुद भीम आर्मी वालों को भी ..

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बीच में आबकारी विभाग की घोर लापरवाही के चलते एक बार फिर से सहारनपुर चर्चा में आया था लेकिन उस विभाग का भी बोझ अपने सर पर रख कर सहारनपुर पुलिस ने पीडितो को न्याय दिलाने में मदद की थी और न्याय का वो संघर्ष अभी भी यथावत चल रहा है जिसमे हर दोषी को सजा दिलाने के लिए सहारनपुर पुलिस प्रमुख प्रतिबद्ध दिख रहे हैं .. भले ही वो वर्दी वाला ही कोई क्यों न हो .. निश्चित तौर पर ये एक बड़ा बदलाव है जो अपने प्रमुख के नेतृत्व में सहारनपुर पुलिस के जवानो ने कर के दिखाया है.. जिस किसी को भी ये बदलाव व्यक्तिगत रूप से देखना हो वो जमीनी हकीकत स्वय जा कर देखने के लिए स्वतंत्र है ..

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अगर इन सब की तह में जाया जाय तो सहारनपुर के वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी ने आने के बाद ये बदलाव देखने को मिला है . सहारनपुर के चाहे साम्प्रदायिक विवाद या जातीय विवाद के साथ अवैध खनन के लिए कभी विपक्ष पुलिस को ही प्रथम दोषी ठहराता था . लेकिन SSP दिनेश कुमार पी के आने के बाद किसी के पास भी कोई एक भी बड़ी वजह ऐसी नहीं मिली है जो पुलिस के बहाने सत्ता को दोषी ठहराए..

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