इटली की महिला पहुँची सत्य सनातन की शरण में… काशी पहुंचकर बोली- मेरे बेटे की आत्मा को शांति दिला दो

मंदिरों और घाटों की नगरी कही जाने वाली काशी जो बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी है। पूरी दुनिया में काशी ही एकमात्र ऐसा तीर्थ स्थान है, जहां पर 3 नदियां, 8 कूप, 11 कुंड, 84 घाट, 1 ज्योतिर्लिंग, 29 छंद, अष्ट रुद्र, अष्ट भैरव, 218 देवियां, हनुमान पीठ, अष्ट यात्राएं, शक्तिपीठ, देवताओं एवं ऋषियों द्वारा स्थापित 324 शिवलिंग और 21 शिवमूर्तियां स्थापित हैं। ऐसा कहा जाता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर स्थापित है, इसलिए यह तीनों लोकों से न्यारी है। 
इस महाश्मशान नगरी में जो अपने शरीर का त्याग करता है, वह पुण्य लोकों में निवास करने के बाद सदा-सदा के लिए सदाशिव का सान्निध्य प्राप्त कर मुक्त हो जाता है। आपको बता दें कि इटली की रहने वाली एक महिला सारा ने अपने मृत बेटे के आत्मा की शांति के लिए गंगा किनारे तुलसी घाट पर कर्मकांड का अनुष्ठान कराया। इस अनुष्ठान को करने वाले पंडित बेचू महाराज ने बताया कि सारा नाम की महिला ने अपने बेटे की आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड अनुष्ठान और पिंडदान करवा रही थी। 
वहीं, सारा ने कहा कि मुझे लगता है कि पावन नगरी काशी से मेरा जन्म-जन्मांतर का नाता है ये मेरी खुशकिस्मती है कि मैं अपने बेटे की आत्मा की शांति दिलाने के लिए काशी आई हुं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे की मौत बीमारी की वजह से हुई थी। सारा का कहना है कि उसकी एक एनआरआई दोस्त आरती ने बताया था कि अकाल मृत्यु के बाद ‘शिव की नगरी में अनुष्ठान कराने से उसके बेटे की आत्मा शांति के लिए श्राद्धकर्म किया जाये तो उसे मोक्ष’ मिलेगा। 
सारा ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि मेरे बेटे को भी शिव की नगरी में अनुष्ठान के बाद मोक्ष जरूर मिल जायेगा। उसने किताबों व अपने दोस्तों से काशी के महत्व के बारे में सुना और पढ़ा है कि धरती पर केवल यही जगह है जहां अकाल मृत्यु होने के बाद श्राद्ध-कर्म करने से मुक्ति मिलती है। भारतीय संस्कृति की मुरीद सारा को मंत्रोच्चार करना अच्छा लगता है। वो चाहती है कि उसका अगला जन्म काशी में ही हो। वह हिन्दू धर्म के प्रति बहुत आस्था रखती है।
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