बच्चों के निवाले पर विद्यालय का डाका,सुदर्शन न्यूज चैनल ने किया खुलासा

चंदौली / उत्तर प्रदेश 

बच्चो के निवाले पर विद्यालय का डाका- स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मस्तिक का वास होता है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए सरकार ने विद्यालय में गरमागरम मिड डे मील की ब्यवस्था कर रखी है। मिड डे मील योजना के तहत बच्चो को विद्यालय में मीनू के अनुसार प्रति दिन बदल – बदल कर पौष्टिक आहार की व्यवस्था है।

सप्ताह में एक दिन दूध एक दिन फल की भी व्यवस्था है लेकिन अधिकांश ऐसे विद्यालय है जो बच्चो के निवाले पर ही डाका डाल रहे है। और बच्चो के अधिकारो का हनन कर रहे है। बरहनी विकास खंड स्थित *किसान इंटर कालेज* बेशर्मी कि सारी हदें पार करते हुए बच्चो के मिड डे मील पर ही खुलेयाम डाका डाल रहा है।

*विद्यालय में दो सौ से ज्यादा बच्चे नामांकित है* इन सभी बच्चो को मिड डे मील बनाने में लगभग चार किलो चावल का प्रयोग होता है साथ ही दो किलो आलू और एक किलो दाल का प्रयोग होता है। यदि सौ ग्राम चावल प्रति बच्चे के हिस्से में आता है तो ऐसे में चालीस बच्चो को ही भोजन मील सकता है।

बाकी एक सौ साठ बच्चो को भ्रष्ट विद्यालय प्रशासन भोजन कैसे देता होगा ये विचारणीय प्रश्न है। सरकार के *इस मिड डे मील योजना में किसान इंटर कालेज शिक्षा विभाग के मिली भगत से खुलेआम लूट मचा रखी है।* योगी सरकार जहां भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है वहीं भ्रष्ट अधिकारी उनके प्रयासों पर पानी फेरते हुए नजर आ रहे है।

जरा सोचिए जहां भारत का भविष्य तैयार होता है जहां एक मजबूत राष्ट्र निर्माण कि शिक्षा दी जाती है उनको राणा प्रताप शिवाजी भगत चंद्रशेखर जैसे महान व्यक्तियों जैसे बनने की प्रेरणा दायक शिक्षा दी जाती है वहीं विद्यालय में इन होनहारों के पेट पर ही *विद्यालय प्रशासन द्वारा अधिकारियों के मिली भगत से डाका डाला जा रहा है* तो क्या ऐसे में एक मजबूत राष्ट्र निर्माण का सपना पूरा होगा।

इस भ्रष्टाचार की पोल उस समय खुल गई जब विद्यालय पर *सुदर्शन न्यूज चैनल की टीम आ धमकी।* जिला संवाददाता *प्रशांत सिंह* जब पूरी टीम के साथ पहुंचे तो मिड डे मील बन रहा था वे भी लकड़ी पर पूछने पर रसोइए ने बताया कि कई दिनों से हम लोग गैस के अभाव में लकड़ी पर ही भोजन बना रहे है।

*संवाददाता ने पूछा कि कितने बच्चो का भोजन बन रहा है तो शिक्षक सहित रसोइए ने बताया कि दो सौ से ज्यादा बच्चो का भोजन बनता है।* जबकि भगोने में लगभग चार से पांच किलो चावल था। पूछने पर कि कैसे इतने चावल में सब बच्चे भोजन करेंगे तो विद्यालय के शिक्षक और रसोइए का कहना था कि फिर से बाद में बनाकर खिलाएंगे जब की बच्चो को अवकाश के समय में ही भोजन कराना है इसके बाद शिक्षण कार्य करना है।

बच्चो के भविष्य एवं स्वस्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है इसके बाद भी जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग मौन साधे हुए है। सबसे हास्यप्रद स्थिति तब हो गई जब जब *जिला संवाददाता ने पूछा कि बच्चो को फल एवं दूध क्यों नहीं बितारित किया जा रहा है तो विद्यालय के प्रिंसिपल संजय सिंह ने कहा कि सरकार को इस योजना को बंद कर देनी चाहिए। हम लोग बच्चो को फल न ही दूध दे सकते है।* विद्यालय में शौचालय कि स्थिति दयनीय बनी हुई है उसके चारो तरफ झाड़ झंखाड़ लगा हुआ है।

बरसात के दिनों में जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना हुआ है। शौचालय का दरवाजा टूटा हुआ है । हैंड पम्प खराब है विद्यालय परिसर में भारी मात्र में जल भराव है बच्चो को विद्यालय परिसर में आने में फअसुविधा का सामना करना पड़ता है। विद्यालय भ्रष्ट मैनेजमेंट और प्रधानाचार्य के चलते बदहाली का आशू बहा रहा है।

प्रशान्त सिंह

वेब जर्नलिस्ट

92649 15248

 

 

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